भुसावर में अवैध खनन और ब्लास्टिंग से ग्रामीण परेशान, घरों में आई दरारें
वैर-भुसावर क्षेत्र में अरावली की पहाड़ियों में अवैध खनन और रात के समय हो रहे धमाकों से वन संपदा को नुकसान और फसलों पर बुरा असर पड़ रहा है।

राजस्थान के भुसावर क्षेत्र के घाटरी गांव में अवैध खनन के कारण एक ग्रामीण के घर की दीवार में आई दरार को दिखाता दृश्य।
भुसावर। उजड़ती पहाड़ियां, गायब होती हरियाली एवं पहाड़ खुदाई को किए जा रहे विस्फोट से ग्रामीण परेशान हैं, जिनके घरों में दरारें पड़ गई और आए दिन हादसे हो रहे हैं। खनिज एवं वन विभाग के द्वारा उक्त बिंदुओं पर ध्यान नहीं देना वन संपदा एवं मानव जीवन के लिए घातक साबित हो रहा है।
खनन माफियाओं के बुलंद हौसले और प्रशासनिक खानापूर्ति
खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं, जो खुलेआम अरावली पर्वतमाला की पहाड़ियां, वन विभाग अधीनस्थ एवं आबादी क्षेत्र के निकट खनन कार्य करने में जुटे हुए हैं। प्रशासन, वन, पुलिस और खनिज विभाग के द्वारा अवैध खनन की रोकथाम को अभियान चला रखा है। अभियान के तहत वैर-भुसावर उपखंड में कई स्थान पर नाका बना रहे हैं, जहां वन विभाग ने बिट प्रभारी भी लगा रखे हैं एवं समस्त विभाग के आलाधिकारी व कर्मचारी तैनात हैं, जो केवल अभियान की खानापूर्ति करने में जुटे हुए हैं।
- रेवेन्यू विभाग व खनन विभाग ने आज तक मात्र पत्थर से भरे कुछ ही ट्रैक्टर-ट्रॉली ही पकड़े।
- मूक-बधिर बने अभियान में जुटे आलाधिकारी, कर्मचारी एवं अन्य को जयपुर नेशनल हाइवे-21 एवं धौलपुर मेघा हाइवे-45 सहित अन्य सड़क मार्ग पर पत्थर-बंजरी एवं रेता से भरे डम्फर, ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली आदि वाहन दौड़ते नजर नहीं आते।
- ऐसे दृश्य को देख ग्रामीणों में अनेक प्रकार की चर्चाएं व्याप्त हैं।
अभियान की खानापूर्ति से खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं, जिन्हें मुख से निकली सुविधाएं मिल रही हैं, जिसके कारण खनन, रेवेन्यू, वन, पुलिस एवं प्रदूषण आदि विभाग चुप्पी लगाए हुए हैं।
दिन-रात जारी है अवैध खनन का काला खेल
वैर-बल्लभगढ़ मार्ग व घाटरी में क्रेशर जोन की पगड़ियों में, माइंदपुर निठार में रेवेन्यू विभाग की पहाड़ियों में अवैध खनन होता है, जो दिन-रात चलता रहता है। उक्त अवैध खननकर्ता खुलेआम अवैध खनन करते हैं और रात्रि के समय पहाड़ की खुदाई को विस्फोट होता है।
- रात्रि में ट्रैक्टर चालक ट्रैक्टरों को पत्थर से भर लेते हैं और सुबह अंधेरे में वन विभाग व रेवेन्यू खनन प्रशासन की आंख में धूल झोंक रहे हैं।
- ये नजारा खुलेआम प्रशासन देख रहा है।
- ग्रामीणों ने बताया कि इन अवैध खननकर्ताओं से क्रेशर संचालक भी सस्ते दामों में पत्थर खरीदते हैं।
कई बार अवैध खनन की रोकथाम की बोला गया और विस्फोट बंद करने की मांग की, लेकिन उन्होंने ग्रामीणों की बात पर ध्यान नहीं दिया। इसी प्रकार से गांव मायदपुर के पास भी कई पहाड़ियों में अवैध खनन कर रहे हैं, जहां भी प्रशासन के अभियान की पालना नहीं होती, रात्रि को खुलेआम क्रेशर संचालकों के सहयोग से अवैध खनन चलता है।
जानलेवा बनती क्रेशर की धूल और ब्लास्टिंग का कहर
क्रेशर संचालकों को मानव जीवन की चिंता नहीं है, उन्हें केवल स्वयं के कारोबार की चिंता है। वे प्रशासन, वन एवं खनिज विभाग से मिलीभगत कर खुलेआम विस्फोट कर पहाड़ की खुदाई करने लगे हैं।
- पत्थर उछल कर आबादी क्षेत्र में गिरते हैं और क्रेशर की धूल उड़कर फसल पर गिरती है।
- घरों में दरारें आने लगी हैं और फसल की पैदावार पर बुरा असर पड़ता है।
- रात्रि के समय विस्फोट की आवाज से ग्रामीण भयभीत हो जाते हैं और नींद गायब हो जाती है।
प्रभावित क्षेत्र और अधिकारियों के तर्क
गांव घाटरी, मंसापुरा, जसवर, सुआकी, कारवान, कोटकी, नयागांव खालसा, सुहारी, खोहरा, भौडागांव, हाथौडी, खातीपुरा, महाराजपुरा, सामन्तपुरा, पथैना, भुसावर, वैर, नीमली आदि स्थान पर अवैध खनन जारी है।
ग्रामीणों ने बताया कि कई बार उपखंड अधिकारी राधेश्याम मीणा से अवैध खनन के बारे में शिकायत की, पर उपखंड अधिकारी का एक ही जवाब मिलता है:
"खनन विभाग के साथ मिलकर कार्यवाही की जाएगी।"
पर पांच महीने गुजर जाने के बाद भी न तो रेवेन्यू विभाग ने कार्यवाही की और न ही खनन विभाग ने। केवल उजड़ती ही पहाड़ियों का नजारा रेवेन्यू विभाग देख रहा है। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए बताया कि पुलिस, रेवेन्यू व खनन विभाग को पैसे दिए जाते हैं इसलिए प्रशासन कार्यवाही नहीं करता है।
जब अवैध खनन के बारे में रेंजर राजेश शर्मा से बात की तो उन्होंने बताया:
"हमारी टीम वन क्षेत्र में अवैध खनन को रोकने में लगी हुई है। जल्द ही बड़ी कार्यवाही की जाएगी।"

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