भरतपुर।

भूख, अभाव और अनिश्चित भविष्य के बीच संघर्ष की अनगिनत रातें गुजारने वाले भरतपुर के युवा क्रिकेटर कार्तिक शर्मा ने आज अपनी मेहनत से इतिहास रच दिया है। कभी पैसे खत्म होने पर पिता के साथ रेन बसेरा में रात बिताने वाला यह खिलाड़ी अब इंडियन प्रीमियर लीग में 14.20 करोड़ रुपये में बिककर देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। यह कहानी केवल क्रिकेट की नहीं, बल्कि सपनों, त्याग और अटूट विश्वास की है।

IPL में चयन के बाद कार्तिक शर्मा अपने माता-पिता के साथ भरतपुर पहुंचे। शहर के खिरनी घाट स्थित अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित स्वागत समारोह में भरतपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन सहित शहर के कई गणमान्य नागरिकों ने उनका अभिनंदन किया। इस दौरान मंच से कार्तिक के पिता मनोज शर्मा ने बेटे के संघर्ष और परिवार की कठिन यात्राओं को साझा किया, जिसे सुनकर पूरा सभागार भावुक हो उठा।

मनोज शर्मा ने बताया कि वे निजी ट्यूशन पढ़ाकर परिवार चलाते थे, जिससे आमदनी सीमित थी। बावजूद इसके उन्होंने और उनकी पत्नी राधा शर्मा ने ठान लिया था कि बेटे को क्रिकेटर बनाना है, चाहे इसके लिए कितनी भी कीमत चुकानी पड़े। इस सपने को पूरा करने के लिए बहनेरा गांव में स्थित प्लॉट और खेत तक बेच दिए गए, वहीं राधा शर्मा ने अपने गहने भी त्याग दिए। यह सब कार्तिक के भविष्य के लिए किया गया एक बड़ा और कठिन फैसला था।

संघर्ष की सबसे कठिन घड़ी तब आई, जब पिता-पुत्र ग्वालियर में एक क्रिकेट टूर्नामेंट खेलने पहुंचे। सीमित संसाधनों के कारण उनके पास केवल चार-पांच मैच तक रुकने के ही पैसे थे, लेकिन टीम अप्रत्याशित रूप से फाइनल तक पहुंच गई। पैसे खत्म होने पर कार्तिक और उनके पिता को रेन बसेरा में शरण लेनी पड़ी और एक रात भूखे भी सोना पड़ा। फाइनल का पुरस्कार मिलने के बाद ही वे किसी तरह घर लौट सके।

मनोज शर्मा ने बताया कि कार्तिक की प्रतिभा का संकेत बहुत छोटी उम्र में ही मिल गया था। जब वह मात्र ढाई साल का था, तब उसने घर में रखे बल्ले से गेंद मारी, जिससे दीवार पर लगी तस्वीरें टूट गईं। उसी दिन से परिवार को विश्वास हो गया था कि यह बच्चा कुछ अलग करेगा। खुद मनोज शर्मा भी कभी क्रिकेटर थे और मीडियम पेस गेंदबाजी करते थे, लेकिन चोट के कारण उनका करियर अधूरा रह गया। वही सपना उन्होंने अपने बेटे के जरिए पूरा होते देखा।

कार्तिक की मां राधा शर्मा, जो नगर निगम में कार्यरत हैं, ने कहा कि बेटे के लिए उन्होंने हर कठिनाई सहन की। परिवार ने सीमित साधनों में रहते हुए भी कभी उसके हौसले को टूटने नहीं दिया। यही समर्थन आज उसकी सबसे बड़ी ताकत बना।

अपनी सफलता पर कार्तिक शर्मा ने कहा कि यह उनके जीवन का पहला मौका है, जब उन्हें इतने बड़े स्तर पर पहचान मिली है। उन्होंने इसी वर्ष 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की है और अब स्नातक में प्रवेश लेने की तैयारी कर रहे हैं। खेल के साथ पढ़ाई जारी रखने का उनका संकल्प है। उन्होंने बताया कि अंडर-14 और अंडर-16 खेलने के बाद चार साल तक लगातार चयन नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अंडर-19 में प्रदर्शन के बाद रणजी ट्रॉफी का अवसर मिला और वहीं से IPL तक का रास्ता खुला।

आज कार्तिक शर्मा की यह उपलब्धि केवल एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि उस संघर्ष का प्रमाण है, जिसमें भूख, अभाव और निराशा के बावजूद सपनों को जिंदा रखा गया। भरतपुर की इस मिट्टी से निकली कहानी अब पूरे देश को यह संदेश दे रही है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और मेहनत से इतिहास रचा जा सकता है।

Pratahkal Bureau

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