होलाष्टक 2026: फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से मांगलिक कार्यों पर लगी रोक
24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च होलिका दहन तक रहने वाले होलाष्टक के दौरान विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है।

भुसावर में पंडितों ने होलाष्टक की अवधि के दौरान 16 संस्कारों और नए व्यापार की शुरुआत को कष्टकारी बताते हुए भक्ति व साधना पर जोर दिया है।
भुसावर। होली का त्योहार आने से ठीक आठ दिन पहले होलाष्टक शब्द होली और अष्टक (आठ) से मिलकर बना है। जहां होलाष्टक की शुरुआत इस महीने 24 फरवरी मंगलवार को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से सुबह 07 बजकर 05 मिनट से शुरू होकर 3 मार्च पूर्णिमा को सांयकाल 05 बजकर 11 मिनट तक होलिका दहन तक चलने वाली इस अवधि में सभी शुभ मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है।
होलाष्टक: शुभ कार्यों पर पाबंदी और वर्जित संस्कार
विद्वान पंडितों ने जानकारी देते हुए बताया कि:
- "होलाष्टक को एक दोष की अवधि माना जाता है।"
- इस लिए होलाष्टक के दौरान विवाह, सगाई, जनेऊ, नामकरण और मुण्डन जैसे सोलह संस्कार, वाहन व भूमि क्रय नहीं करने के साथ नया व्यापार शुरू करना या ग्रह प्रवेश कष्ट कारी हो सकता है।
- वहीं नवविवाहिताओं को होलाष्टक की अवधि में अपने मायके में बितानी चाहिए।
भक्ति, तप और साधना के लिए विशेष फलदायी समय
होलाष्टक शुभ कार्यों के लिए वर्जित है, लेकिन व्रत, पूजन, हवन और साधना के लिए यह समय अत्यंत (श्रेष्ठ) महत्वपूर्ण माना गया है।
"इस होलाष्टक के दौरान भगवान की भक्ति करने से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। और तांत्रिक दृष्टि से यह समय सिद्धियों और साधनाओं के लिए उपयुक्त माना जाता है, लेकिन शुभ कार्यों के लिए नहीं।"
पूर्णिमा तिथि और भद्रा का समय
पूर्णिमा और भद्रा की समय सारणी इस प्रकार है:
- पूर्णिमा 02 मार्च को सांयकाल 05 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर 03 मार्च को सांयकाल 05 बजकर 11 मिनट तक रहेगी।
- वहीं 02 मार्च को पूर्णिमा के साथ ही सांयकाल 05 बजकर 59 मिनट से भद्रा आरम्भ होगा जो कि 03 मार्च की सुबह 05 बजकर 25 मिनट तक रहेगी।
धैर्य और शुद्धि का संदेश
वहीं होलाष्टक में हमें धैर्य और भक्ति का संदेश देता है। यह समय अपनी वासनाओं और बुराईयों को जलाने की तैयारियों का है।

Mohan Joshi, Bharatpur
नाम: मोहन लाल जोशी
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: भरतपुर (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): तहसील रिपोर्टिंग, क्राइम (अपराध), एग्रीकल्चर फार्मिंग (कृषि), प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जनसमस्याएं
परिचय एवं अनुभव
मोहन लाल जोशी को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में एक लंबा और विविध अनुभव है। वह वर्तमान में भरतपुर क्षेत्र से विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उनके करियर का विवरण निम्नलिखित है:
- राजस्थान पत्रिका: इन्होंने 10 वर्षों तक राजस्थान पत्रिका में अपनी सेवाएं दी हैं, जहाँ मुख्य रूप से क्राइम, एग्रीकल्चर फार्मिंग और जन समस्याओं से संबंधित विषयों पर विस्तृत कवरेज की।
- ईटीवी राजस्थान (जयपुर): 14 साल पहले इन्होंने ईटीवी राजस्थान, जयपुर के साथ काम किया।
- शेर-ए-हिंदुस्तान: इस मीडिया संस्थान के साथ भी काम करने का अनुभव।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
मोहन लाल जोशी शैक्षणिक और तकनीकी रूप से पत्रकारिता में उच्च योग्यता रखते हैं:
- स्नातक (Graduation)
- बीजेएमसी (BJMC): बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन
- पीएचडी (Ph.D.): पत्रकारिता (Journalism) में उनकी पीएचडी वर्तमान में जारी है।
