बयाना के झील सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल: 45 मिनट तक बंद रहा ताला, तड़पते मरीजों ने किया भारी हंगामा
बयाना के झील सीएचसी में डॉक्टरों की लेटलतीफी पर मरीजों का गुस्सा फूटा। 45 मिनट देरी से खुले अस्पताल के ताले और नदारद स्टाफ को देखकर ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की। वीडियो वायरल होने के बाद सीएचसी प्रभारी डॉ. छगनलाल शर्मा और बीसीएमओ ने चाबी की गलती मानकर सुधार का दावा किया है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

बयाना (भरतपुर)। सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता और डॉक्टरों की लेटलतीफी ने एक बार फिर आम जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। बयाना उपखंड के झील सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में शुक्रवार की सुबह उस वक्त अफरा-तफरी और भारी आक्रोश का माहौल बन गया, जब इलाज की आस में आए दर्जनों मरीजों को अस्पताल के बंद दरवाजे और खाली कुर्सियों ने मुंह चिढ़ाया। निर्धारित समय बीत जाने के पौन घंटे बाद तक जब कोई जिम्मेदार मौके पर नहीं पहुंचा, तो मरीजों और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और अस्पताल परिसर नारों की गूंज से दहल उठा। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शुक्रवार सुबह 9 बजे जब दूर-दराज के गांवों से आए बीमार मरीज और उनके तीमारदार झील सीएचसी पहुंचे, तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। अस्पताल का मुख्य गेट अंदर से बंद था और कोई भी चिकित्सक या स्टाफ सदस्य वहां मौजूद नहीं था। जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आगे बढ़ीं, मरीजों का दर्द और उनकी बेचैनी भी बढ़ती गई। करीब 45 मिनट के लंबे इंतजार के बाद सुबह 9:45 बजे संविदा कर्मचारी जितेंद्र, जो पर्ची काटने का काम संभालता है, उसने आकर अस्पताल का ताला खोला। लेकिन गेट खुलने के बाद भी जब डॉक्टर अपनी ड्यूटी पर नजर नहीं आए, तो ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। आक्रोशित लोगों ने अस्पताल परिसर में ही सिस्टम की लापरवाही के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और इस अव्यवस्था को अपने कैमरों में कैद कर लिया।
विवाद गहराते देख जब इस मामले में झील सीएचसी प्रभारी डॉ. छगनलाल शर्मा से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने चौंकाने वाला तर्क पेश किया। डॉ. शर्मा ने स्वीकार किया कि अस्पताल का समय सुबह 9 बजे का है, लेकिन उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि अस्पताल की चाबी गलती से 108 एम्बुलेंस कर्मियों के कमरे में रह गई थी, जिस कारण अस्पताल समय पर नहीं खुल सका। हालांकि, प्रभारी ने खुद के 9:45 बजे पहुंचने का दावा किया, लेकिन तब तक अस्पताल की गरिमा और मरीजों का विश्वास दोनों तार-तार हो चुके थे।
प्रशासनिक स्तर पर इस लापरवाही को लेकर बीसीएमओ डॉ. धर्मेंद्र चौधरी ने संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि सीएचसी प्रभारी को व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए हैं और चाबी के गुम होने या अन्यत्र रह जाने जैसे तर्कों को भविष्य में न दोहराने की हिदायत दी गई है। डॉ. चौधरी ने आश्वासन दिया है कि आगामी दिनों में अस्पताल समय पर खुलेगा। बहरहाल, इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की उस जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है जहां जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी नियमों को ताक पर रखकर जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से मांग की है कि केवल मौखिक हिदायत के बजाय लापरवाह स्टाफ पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी मरीज को इलाज के लिए बंद दरवाजों के बाहर न तड़पना पड़े।

Pratahkal Bureau
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