हलैना किसान सम्मेलन: ERCP को राष्ट्रीय परियोजना बनाने और ट्रेड डील रद्द करने की माँग
भरतपुर के हलैना में किसान महापंचायत आयोजित, बाणगंगा नदी में पानी लाने, एमएसपी गारंटी और डीग-भरतपुर को एनसीआर से बाहर करने पर हुई चर्चा।

भरतपुर के हलैना में आयोजित किसान सम्मेलन के दौरान मंच पर विचार व्यक्त करते पूर्व सांसद पंडित रामकिशन, राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट और अन्य किसान नेता।
भुसावर। भरतपुर के कस्वा हलैना में आयोजित किसान सम्मेलन में जहाँ इआरसीपी को केन्द्र सरकार से तुरन्त राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर सूखी पड़ी वाणगंगा नदी में पानी लाने की हुई माँग वही केन्द्र सरकार द्वारा भारत - अमेरिका के बीच मोदी सरकार ने दबाब में आकर किये व्यापारिक समझौता ट्रैड़ डील को किसान मजदूर और छोटे व्यापारियों को बर्बाद करने बाला समझौता बताया। जबकि उपस्थित नेताओं और किसानों ने भरतपुर और डीग जिलो को एनसीआर से बाहर करने की माँ की।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील और किसानों की बदहालीकिसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि "केन्द्र सरकार अमेरिका के दबाब में है और अपने उद्योगपति साथियों को बचाने के लिये भारत की खेती किसानी को बर्बाद करना चहाती है, इस ट्रैड डील के बाद तो कपास, मक्का, सोयाबीन, सेब, पशुपालन से सम्बन्धि उत्पाद आदी उत्पादक किसान बर्बाद हो जायेगा जबकि अन्य उत्पाद में सभी किसान तवाह हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि शून्य कर पर अमेरिका का उत्पाद हमारे यहाँ सस्ता पड़ेगा फिर हमारे किसानों का क्या होगा। हमारे उत्पादों पर 18% टेरिफ जब लगेगा तो हमारा उत्पाद कौन खरीदेगा। जिससे छोटे व्यापारी भी प्रभावित होगे।"
देश भर में किसान दुखी है, कर्ज में दबे है और आत्महत्याऐं कर रहे है - रामपाल जाट। देश में आर्थिक और सामाजिक गैरबराबरी बढ़ रही है।
विफल विदेश नीति और घटता कृषि बजटहरियाणा की धनकड़ खाप पंचायत के प्रधान डा० ओमप्रकाश धनकड़ ने कहा कि "केन्द्र सरकार की विदेश नीति भी विफल साहित हुई है, आज करीब करीब हमारे सभी पड़ौसी मुल्को से रिश्ते खराब है और पड़ौसी को नहीं बदला जा सकता। देश में नफरत पैदा की जा रही है।"
अलवर के किसान नेता विरेन्द्र मोर ने कहा कि "देश भर के किसान दुःखी है संघर्षरत है लेकिन केन्द्र सरकार किसानो की नहीं सुनती। कृषि का बजट लगातार घटता जा रहा है और किसान मजदूर और पशुपालकों की सुवधाओं में लगातार मोदी सरकार कटौती करती जा रही है।"
एमएसपी का अभाव और झूठे वायदेडीग के किसान नेता मोहन सिंह गुर्जर ने कहा कि "किसान खेती करना नहीं चहाता क्योंकि खेती में लाभ की बात तो दूर नहीं उनको लागत भी नहीं मिल पाती, आज सभी किसान कर्जदार है और लाखों किसान अब तक आत्म हत्याऐं कर चुके है। केन्द्र सरकार किसानों को उनके उत्पादो के लाभकारी मूल्य तो देना दूर की बात है एमएसपी भी नहीं मिल रहा है।"
प्रोफेसर डा० संजय शर्मा ने कहा कि "सरकार ने वर्ष 2014 में किसानों की दुगनी आय करने का वायदा किया था जो झूठा सावित हुआ है। देश में आर्थिक और सामाजिक गैरबराबरी तेजी से बढ़ती जा रही है और इसके लिये भाजपा और उसकी सरकार की नीतिया जिम्मेबार है। केन्द्र सरकार की गलत नीतियो के ही कारण मात्र कुछ प्रतिशत लोग ही अरबपति होते जा रहे है और गरीब और गरीब होता चला जा रहा है। सरकार कमजोर और गरीब लोगो की सुविधाओं में लगातार कटौती करती जा रही है।"
इआरसीपी (ERCP) और बाणगंगा नदी में पानी की माँगशतायू पूर्व सांसद पंड़ित रामकिशन ने कहा कि "राज्य के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा केन्द्र सरकार के नेताओं के भरोसे के है और उसी आधार पर मुख्यमंत्री बने है, मुख्यमंत्री को अपने सम्बन्धों के हिसाब से ईआरसीपी को शीघ्र राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराना चाहिये। गौरतलब है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं दो वर्ष पूर्व इआरसीपी पीकेसी का उदघाटन करके गये थे लेकिन ऐसा क्या कारण है कि इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित नहीं किया गया।" उन्होंने बाढ़ रोकने के लिये गम्भीर नदी पर बाँध या ऐनिकट बनाने की जरूरत बताई। इआरसीपी बने राष्ट्रीय परियोजना - रामकिशन।
किसान नेता और किसान सम्मेलन के आयोजक इन्दल सिंह जाट ने कहा कि:
- हम लोग पानी के लिये वर्ष 2007 से लगातार संघर्ष कर रहे है।
- वैर, भुसावर, हलैना सहित पूरे भरतपुर जिले में पानी का गम्भीर संकट है।
- गहरे पातालतोड़ ट्यूबबैल भी सूख चुके है, बाणगंगा नदी सूखी पड़ी है इसमें प्रथम चरण में पानी मिलना चाहिये।
- किसान बगैर पानी के परेशान है जबकि जरूरत से कई गुना अधिक पानी हर वर्ष चम्बल नदी से बेकार बहकर समुद्र में चला जाता है लेकिन सरकार ध्यान नहीं दे रही।
किसान नेता इन्दल सिंह ने कहा कि "केन्द्र सरकार की मनमानी और भाजपा की आपसी गुटबाजी के कारण पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना 10 वर्ष लेट हो चुकी है, और जो इआरसीपी की योजना 37 हजार करोड़ की थी वो आज 70 हजार करौड़ लागत की पहुंच गई अब इसे केन्द्र सरकार को शीघ्र राष्ट्रीय परियोजना घोषित करके बजट आवंटित करना चाहिये।"
उन्होंने अन्य महत्वपूर्ण बिंदु रखे:
- योजना पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
- यमुना के पानी का समझौता वर्ष 1994 में हुआ था लेकिन द्वितिय चरण का पानी अभी तक डीग और भरतपुर को नहीं मिला है, वो पानी भी यहाँ के किसानों को मिलना चाहिये।
- प्रधानमंत्री तो जब चाहे बैठक बुला सकते है, जब जिस योजना का उदघाटन स्वयं प्रधानमंत्री ने किया हो तब इतना विलम्ब होना संशय पैदा करता है।
- भरतपुर में लगे प्रदूषण रहित उद्योग धन्धे, बेरोजगारी अधिक - इन्दल सिंह जाट।
- हाइवे की जमीन की सीमा घटे और गत वर्ष के ओला पीड़ित किसानों को मिले मुआवजा।
- भरतपुर और डीग को एनसीआर से बाहर करने की माँग - मोहन सिंह गुर्जर।
इस अवसर पर इस क्षेत्र के किसानों की और से पूर्व सांसद पंड़ित रामकिशन का उनके जीवन के सौ वर्ष पूरे होने पर अभिनंदन किया गया और लोगों ने दीघायू होने की शुभकामनाएं दी। जुझारू किसान नेता इन्दल सिंह का भी स्वागत किया गया। अरावली संरक्षण यात्रा का भी सम्मान किया गया। बाहर से आये अतिथियों का स्वागत तथा हलैना ब्राहमण समाज द्वारा शतायू पंड़ित रामकिशन और अतिथियो का सम्मान किया गया।
सम्मेलन में सम्मिलित मुख्य अतिथि एवं गणमान्य नागरिककिसान सम्मेलन का संचालन इन्दल सिंह जाट ने किया। सम्मेलन में निम्नलिखित लोगों ने हिस्सा लिया:
- डीग के किसान नेता मोहन सिंह गुर्जर, अलवर के विरेन्द्र मोर, राजाराम भूतौली, डा० संजय शर्मा।
- गिरराज सरपंच, अन्नू ठाकुर, केशव देव शर्मा सरपंच, हाकिम सिंह गुर्जर।
- अलवर के लोकेश फौगाट, हरिसिंह कमालपुरा, राम खिलाड़ी सैनी, होती सैनी।
- मिठ्ठू सिंह बाँसी, राम कुमार भारद्धाज बाड़ी, रोज खाप पंचायत के अनिल रोज।
- अरावली संरक्षण यात्रा की कुसुम रावत, देवा गुरुजी हिन्डौन, सत्य वीर जिलेदार पैघोर।
- अंजली, दिलीप जैन, चन्द्र प्रकाश सौलंक, पंड़ित राजदेव शास्त्री, भगवत जाटव।
- रामखिलाड़ी जाटव, गुलाव बैद्य, बैध सतीश पालीवाल, रविन्द्र सिंह मूड़िय जाट, बबली सरसैना, रामेश्वर जहानपुर।

Pratahkal Bureau
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