भरतपुर संभाग में अमरूद की बागवानी ने किसानों के लिए खोला लाभ का नया रास्ता
भरतपुर संभाग में अमरूद की बागवानी तेजी से बढ़ रही है, जिसमें भरतपुर, सवाईमाधोपुर और करौली जिले के किसान लाभान्वित हो रहे हैं। स्थानीय उन्नत किस्मों ने देश-विदेश में पहचान बनाई है। विभागीय प्रयासों से किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी और आर्थिक लाभ मिल रहा है।

भरतपुर, भुसावर। सर्दियों में स्वास्थ्यवर्धक अमरूद की महक और स्वाद न केवल लोगों के मुँह में पानी ला रहे हैं, बल्कि भरतपुर संभाग की अमरूद बागवानी ने किसानों के लिए आर्थिक अवसर भी बढ़ाए हैं। भरतपुर, सवाईमाधोपुर और करौली जिले में अमरूद की खेती तेजी से फैल रही है, जिससे क्षेत्र के किसानों को स्थायी आय और नई पहचान मिली है।
भरतपुर जिले के वैर और भुसावर उपखंड के गांवों में अमरूद की बागवानी विशेष रूप से बढ़ी है। मोरदा, जटवलाई, वैर, मुहारी, छौंकरवाडा कला, सिरस, बौराज, बिजवारी, आमोली, नयावास, लखनपुर, गोविंदपुरा जैसे गांवों में अमरूद के बाग बड़े पैमाने पर लगाए गए हैं। जिले के बागवान बताते हैं कि जिले में लगभग 1300 हेक्टेयर में अमरूद की बागवानी हो रही है।
अमरूद की उन्नत किस्में लखनऊ-49, सरदार, इलाहाबादी सफेदा, बर्फ खान, वीएनआर-7 और ताइवानी यहां के मुख्य बागवानी उत्पाद हैं। कुछ स्थानों पर काला बादशाह अमरूद भी उगाया जाता है, जिसकी बाहरी और आंतरिक बनावट दोनों काले रंग की होती है। आम अमरूद को 4-5 दिन जबकि वीएनआर-7 को 8-10 दिन तक ताजगी बनाए रखकर बाजार में बेचा जा सकता है।
किसानों का कहना है कि साल 1998 से पहले उन्हें इलाहाबाद, लखनऊ और बनारस जैसे स्थानों से अमरूद मंगवाना पड़ता था। लेकिन अब स्थानीय अमरूद की किस्मों ने देश और विदेश में अपनी पहचान बना ली है। जिला प्रमुख और बागवान द्वारिकाप्रसाद गोयल ने बताया कि भरतपुर अमरूद दिल्ली, आगरा, फरीदाबाद, जयपुर समेत कई बड़े शहरों की फल-सब्जी मंडियों और विदेशों में भी पहुंच रहा है।
उद्यान विभाग और कृषि विभाग के प्रयासों से किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलती है और बागवानी में निवेश के लिए प्रेरित किया जाता है। कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. देशराज सिंह और निदेशक सीताराम गुप्ता ने क्षेत्र में बागवानी को बढ़ावा देने में अहम योगदान दिया है।
भुसावर और वैर उपखंड के गांवों में अमरूद के साथ-साथ नींबू, आवला, बेर, करौजा, आम, मौसमी, किन्नू, पपीता, अनार, कटहर जैसी फलों की बागवानी भी flourishing है। किसानों का मानना है कि बागवानी से उन्हें फसलों की तुलना में अधिक लाभ मिल रहा है और आने वाले समय में अच्छी पैदावार और बेहतर बाजार भाव की उम्मीद है।
भरतपुर संभाग की अमरूद बागवानी न केवल क्षेत्र के किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो रही है, बल्कि यह भारतीय फलों की विविधता और गुणवत्ता को भी बढ़ावा दे रही है।
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Pratahkal Bureau
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