डीग, 28 नवंबर। तालाबों में गंदे पानी के प्रवाह और मरती मछलियों की स्थिति को लेकर पूर्व जिला उपाध्यक्ष गिरीश शर्मा के नेतृत्व में डीग में लोगों ने तीसरे दिन भी धरना दिया। अनशन के दौरान अचानक गिरीश शर्मा की तबीयत खराब हो गई। जानकारी के अनुसार, शर्मा का पहले ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन हो चुका है।

धरने के दौरान गिरीश शर्मा ने बताया कि जिले के लगभग 30 प्रतिशत घरों का गटर का गंदा पानी सीधे तालाबों में जा रहा है। लोगों ने लैट्रिन टैंक भी नहीं बनवाए हैं, जिससे मलमास के महीनों में तालाबों की स्थिति और भी बदतर हो गई है। उन्होंने कहा कि पहले हजारों श्रद्धालु 84 कोस परिक्रमा में तालाबों में स्नान करते थे और तालाबों से प्रसाद के रूप में आचमन करते थे, लेकिन अब गंदे और बदबूदार पानी के कारण पर्यटक जल महल के सौंदर्य और पवित्रता का अनुभव नहीं कर पा रहे हैं।

सफाई की जिम्मेदारी नगर परिषद डीग पर है, सरोवरों में पानी की आपूर्ति सिंचाई विभाग करता है, जबकि तालाबों की मरम्मत पुरातत्व विभाग की जिम्मेदारी है। लेकिन तीनों विभागों के बीच स्पष्ट जिम्मेदारी न होने के कारण तालाबों की देखरेख नहीं हो रही है। गिरीश शर्मा ने चेतावनी दी कि जब तक गटर का पानी और तालाबों के घाटों की सफाई नहीं होती, उनका आमरण अनशन जारी रहेगा।

धरने में जतिन पगुप्ता, रघुवीर सैनी, शंकर सैनी, नरेश सैनी, देवेंद्र, गोविंद, राजीव कुलश्रेष्ठ, बबलू, कन्हैया डागुर सहित कई स्थानीय लोग मौजूद थे और तालाबों की सुरक्षा एवं साफ-सफाई की मांग को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।

इस आंदोलन ने न केवल पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति को उजागर किया है, बल्कि नगर प्रशासन और संबंधित विभागों पर दबाव भी बढ़ा दिया है कि तालाबों की नियमित सफाई, मरम्मत और गंदे पानी के प्रवाह पर नियंत्रण किया जाए।

Pratahkal Bureau

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