भरतपुर के भुसावर में गणगौर पूजन की तैयारी, भगवान को लगेगा 'गुना' का भोग
ऐतिहासिक कस्बे भुसावर में हलवाइयों ने तैयार की पारंपरिक 'गुना' मिठाई, 21 मार्च को सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए करेंगी ईसर-गौरा की विशेष पूजा।

भरतपुर के भुसावर कस्बे में गणगौर पर्व के अवसर पर भगवान ईसर और माता गौरा को अर्पित की जाने वाली पारंपरिक 'गुना' मिठाई तैयार करते स्थानीय हलवाई।
भुसावर (भरतपुर)। भरतपुर जिले के ऐतिहासिक भुसावर कस्बे सहित उपखण्ड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में यूं तो कई पर्व त्यौहार हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार समय-समय पर मनाएं जाते हैं क्योंकि यहाँ कई धर्म के लोग रहते हैं। इन्हीं परम्पराओं में शुमार सोलह दिनों तक अनवरत चलने वाला एवं खेलने वाला ऐतिहासिक पारम्परिक त्यौहार गणगौर पूजन हर्षोल्लास के साथ आयोजित हो रहा है। इस दौरान विभिन्न समाजों की महिलाएं अपने पति अथवा होने वाले पति की लंबी आयु और सुखद भविष्य को लेकर भगवान शिवजी (ईसर) और माता पार्वती (गौरा) की पूजा अर्चना कर मनोकामनाएं मांगती हैं।
सुहाग का प्रतीक 'गुना' मिठाई और हलवाइयों की तैयारी
गणगौर का पर्व एक और खास वजह से जाना जाता है, जहाँ इस पर्व में विशेष मिठाई 'गुना' बनाई जाती है, जो कि साल भर में एक बार ही मिलती है। कस्बे के हिंडौन सड़क मार्ग स्थित रामद्वारा के पास अग्रवाल मिष्ठान भंडार, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के पास सैनी मिष्ठान भंडार सहित अन्य मुख्य बाजार, पुरानी सब्जी मण्डी ऊपरला बाजार और पुरानी अनाज मण्डी सहित विभिन्न बाजारों में हलवाई गणगौर पूजन में माता पार्वती जी और शिव जी को भोग लगाने के लिए एवं सुहाग के प्रतीक पारम्परिक ऐतिहासिक मिठाई गुना बनाने में जुट गए हैं। गुना बनाने के इस कार्य से क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध हो रहा है।
धार्मिक महत्व और पूजन की तिथि
विद्वान पण्डित पुष्पेन्द्र मिश्रा, राघवेन्द्र शर्मा, महेश चन्द शर्मा और रोहित ने जानकारी देते हुए बताया कि "गणगौर पर्व की शुरुआत वैसे तो होली के अगले दिन से शुरू हो जाती है और सोलह दिनों तक अनवरत चलती है, लेकिन चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर गणगौर पर्व का खास महत्व होता है, जहाँ इस वर्ष गणगौर पूजा शनिवार 21 मार्च 2026 को की जाएगी।" उन्होंने आगे बताया कि "गणगौर शब्द का अर्थ शिव और गौरी से मिला हुआ है, इसलिए यह पर्व पति-पत्नी के प्रेम, वैवाहिक जीवन और समर्पण को दर्शाता है।"
सुख-समृद्धि की कामना और व्रत का विधान
इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत रखकर पूजा अर्चना करती हैं। महिला श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती जी की पूजा अर्चना करते हुए भगवान से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि एवं क्षेत्र में खुशहाली की मनोकामनाएं मांगती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती को इस अवसर पर विशेष रूप से गुना का भोग लगाया जाता है, जो इस पूजन का अभिन्न और पौराणिक हिस्सा माना जाता है।

Pratahkal Bureau
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