भरतपुर। हलैना कस्बे में पिछले कई दिनों से एक फीमेल डॉग के उत्पात ने शिक्षा संस्थानों से लेकर गलियों तक दहशत फैला रखी है। पीएम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय और राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के स्टाफ, बच्चों और ग्रामीणों सहित दो दर्जन से अधिक लोग इस डॉग के हमले का शिकार बन चुके हैं। स्थिति यह है कि बच्चे स्कूल जाने से घबरा रहे हैं और शिक्षक भी भय के साए में काम कर रहे हैं।

दर्शकों और ग्रामीणों के अनुसार यह फीमेल डॉग अधिकतर समय विद्यालय परिसर के आसपास ही घूमती रहती है। हमारे संवाददाता ने जब इसे एक कमरे में बंद करने का प्रयास किया तो उस पर भी हमला करने की कोशिश की, हालांकि उन्होंने जोखिम के बावजूद इसका वीडियो रिकॉर्ड किया। यह डॉग स्कूल के प्रांगण में बनी जगहों पर ही डेरा जमाए रहती है।

पीएम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के संस्था प्रधान तुलसीराम शर्मा ने बताया कि उनके विद्यालय के 6 से 8 बच्चों को डॉग काट चुकी है। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई बच्चे डर के कारण स्कूल नहीं आ रहे हैं। उन्होंने वन विभाग को सूचना दी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय संस्कृत के संस्था प्रधान भागचंद मीणा ने भी बताया कि उनके विद्यालय के लगभग 8 से 10 बच्चे और दो शिक्षक इस डॉग के हमले का शिकार हुए हैं। भय इतना है कि शिक्षक स्वयं बच्चों को घर से लाने लगे हैं या फिर परिजन ही उन्हें छोड़कर जाते हैं।

ग्रामीण विष्णु मित्तल के अनुसार फीमेल डॉग ने दोनों स्कूलों के बच्चों, शिक्षकों और ग्रामीणों सहित करीब 25 से अधिक लोगों को घायल किया है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई कर इस डॉग को किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की मांग की है, ताकि स्कूली बच्चों और शिक्षकों का भय समाप्त हो सके और शिक्षा व्यवस्था सामान्य हो सके।

हमले का शिकार हुए बच्चों ने बताया कि वह स्कूल में पानी पीने गए थे, तभी पीछे से डॉग ने उन पर हमला कर दिया। उनका कहना है कि डॉग किसी भी व्यक्ति को देखते ही आक्रामक हो जाती है, जिससे सभी बच्चे और शिक्षक लगातार भयभीत हैं।

हलैना अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सौरभ मीणा ने बताया कि सरकारी स्कूलों के कई बच्चे और शिक्षक डॉग बाइट के चलते अस्पताल पहुंचे, जिनका उपचार कर एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए गए हैं। चिकित्सकों ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।

हलैना कस्बे में फैली इस दहशत ने न केवल शिक्षा व्यवस्था को अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि लोगों के दैनिक जीवन को भी प्रभावित किया है। ग्रामीण अब प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, जिससे कस्बे में सामान्य स्थिति बहाल हो सके।

Pratahkal Bureau

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