डीग में विजय दिवस पर शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि, 1971 की अद्वितीय सैन्य सफलता का स्मरण
डीग में 16 दिसंबर, 1971 की अद्वितीय विजय की 55वीं वर्षगाँठ पर आयोजित विजय दिवस समारोह में शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। कर्नल ओमवीर सिंह ने भारतीय सेना की वीरता और साहस की मिसाल को याद किया, जबकि बाल कवयित्रियों और गणमान्य अतिथियों ने कार्यक्रम को और जीवंत बनाया।

डीग, 16 दिसंबर। भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज 16 दिसंबर, 1971 की अद्वितीय विजय के 55वें वर्षगाँठ के अवसर पर डीग में विजय दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस दिन भारतीय सेनाओं ने अपने साहस और रणनीति से 93,000 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए बाध्य किया था, जो आज तक किसी अन्य देश द्वारा नहीं दोहराया गया है।
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल ओमवीर सिंह ने शहीद स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में अपने उद्बोधन में कहा कि युद्ध का निर्णायक तत्व केवल तलवार, बंदूक या सैनिकों की संख्या नहीं, बल्कि वीरता और साहस होता है। उन्होंने बताया कि इस अद्वितीय विजय में पूर्वी कमान के कमांडर जनरल अरोड़ा और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल मानिक शा के नेतृत्व में पाकिस्तान के जनरल न्याजी ने 93,000 सैनिकों के साथ भारत के सामने आत्मसमर्पण किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्टेशन कमांडर प्रतिनिधि नायब सूबेदार दिनेश कुमार थे, जबकि विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अखिलेश शर्मा, एसडीएम मुकेश चौधरी एवं डीएसपी सीताराम बैरवा उपस्थित रहे। समारोह की शुरुआत अतिथियों द्वारा शहीद स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित करने और कवि चंद्रभान वर्मा चंद्र की “शहीदों को नमन” कविता से की गई।
इस अवसर पर 1971 के युद्ध के महानायकों का सम्मान करते हुए उन्हें पारंपरिक साफा पहनाकर विशेष श्रद्धांजलि दी गई। समारोह में बाल कवयित्रियों सौम्या खंडेलवाल, श्रुति कुसुमाकर, वैष्णवी कुसुमाकर, राजेंद्र गुर्जर, कवि चंद्रभान वर्मा चंद्र और आठ वर्षीय शिवन्या कुमारी ने युद्ध वीरों की गाथाओं पर कविताएं और गीत प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में गौरव सेनानी संस्थान के अध्यक्ष कैप्टन अशोक कुमार, की राम भरोसी लाल, कैप्टन बच्चू सिंह, सूबेदार मेजर रतन सिंह, सूबेदार मेजर शिव सिंह, सार्जेंट राजेंद्र सिंह, सूबेदार मुंशी जी, सूबेदार मेजर रमेशचंद शर्मा, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुबोध पाराशर, वरिष्ठ अधिवक्ता रमाकांत शर्मा, व्यवसायी भगवान शरण गुप्ता एवं लक्ष्मण प्रसाद जैन, रमेश चंद्र बंसल और मदनलाल अकाउंटेंट सहित भारी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
यह कार्यक्रम न केवल 1971 की विजय और भारतीय सेना की अद्वितीय वीरता को याद करने का माध्यम बना, बल्कि शहीदों के बलिदान और देशभक्ति की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रेरणादायक अवसर भी साबित हुआ।
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Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
