अलीपुर और खोरा में पेयजल संकट गहराया, जलदाय विभाग की लापरवाही से ग्रामीण बेहाल
भरतपुर जिले के भुसावर क्षेत्र की ग्राम पंचायत अलीपुर और खोरा में जलदाय विभाग की लापरवाही से पेयजल संकट गहराया हुआ है। लाखों की लागत से बनी योजना अधूरी पड़ी है, ग्रामीण पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं, जबकि गौशाला और अस्पताल तक पानी से वंचित हैं।

भुसावर। भुसावर उपखंड की ग्राम पंचायत अलीपुर और उसके आसपास के गांवों में इन दिनों पेयजल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। गांव खोरा, अलीपुर और छोटे नागलों के सैकड़ों ग्रामीण पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (जलदाय विभाग) के अधिकारियों और ठेकेदार की लापरवाही के चलते गांव की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
गांव अलीपुर में विभाग की ओर से लगाए गए डीप बोर में से केवल एक ही चालू हालत में है, जिससे पूरे गांव में पर्याप्त जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। कई हैंडपंप महीनों से खराब पड़े हैं, और विभाग की ओर से उनकी मरम्मत तक नहीं कराई गई है। पानी की कमी से महिलाएं रोजाना दूरदराज के क्षेत्रों से पानी ढोने को मजबूर हैं, जबकि गांव में टैंकरों के सहारे किसी तरह से पानी की पूर्ति की जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जलदाय विभाग ने गांव के लिए ₹268.75 लाख की लागत से बड़ी जल योजना स्वीकृत की थी, जिसके तहत टंकी निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और नल कनेक्शन का काम किया गया। परंतु यह योजना केवल कागजों तक सीमित रह गई। पाइपलाइन डलने के बाद नलों में ठूठी तक नहीं लगाई गई, और खुदी हुई सड़कों को भी सही नहीं कराया गया। गांव में लगे नलों से मुश्किल से एक-दो बाल्टी पानी ही निकलता है, जिससे लोगों की जरूरतें पूरी नहीं हो पातीं।
अलीपुर ग्राम पंचायत के सरपंच रामवीर सिंह गुर्जर ने बताया कि पेयजल की गंभीर किल्लत के चलते उन्हें अपने निजी खर्चे से टैंकरों द्वारा पानी की आपूर्ति करानी पड़ रही है। बावजूद इसके, विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की मनमर्जी के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है। उन्होंने बताया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव की गौशाला और सरकारी अस्पताल में स्थिति और भी दयनीय है। गौशाला में सैकड़ों गायें प्यास से तड़प रही हैं, जबकि अस्पताल में मरीजों और चिकित्सकों को अपने साथ पानी की बोतल लेकर आना पड़ता है। इस संबंध में बीसीएमओ योगेश कुमार शुक्ल ने बताया कि जलदाय विभाग को अस्पताल में जलापूर्ति के लिए लिखित में अवगत कराया जा चुका है, पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
वहीं, गांव खोरा में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। लोग दो किलोमीटर दूर निजी बोरवेलों से कैनों और ड्रमों में पानी लाकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। कई ग्रामीण पास के क्रेशर जोन से पानी लाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन योजना, जो हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, अधिकारियों की उदासीनता और भ्रष्टाचार के कारण विफल साबित हो रही है।
अलीपुर निवासी विशंभर दयाल शर्मा, फिरोज खान, मालती देवी, गौरव, संतोष देवी आदि ने बताया कि जलजीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकी को चार वर्ष से अधिक हो चुके हैं, पर पानी मुश्किल से दस-पंद्रह घरों तक ही पहुंच पाता है। विभाग के अधिकारियों ने बोरो में लगी तीन मोटरों को भी हटा दिया है, जिनका अब तक कोई पता नहीं चला है। इस संबंध में भुसावर उपखंड अधिकारी राधेश्याम मीणा को भी शिकायत दी जा चुकी है।
उपखंड अधिकारी राधेश्याम मीणा ने बताया कि उन्होंने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को पेयजल किल्लत दूर करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, विभाग की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही जलदाय विभाग ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो गांव की स्थिति और भयावह हो सकती है। सरकार की "हर घर जल" योजना जहां अन्यत्र सफल हो रही है, वहीं अलीपुर और खोरा जैसे गांवों में यह केवल कागजों तक सीमित है।
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Pratahkal Bureau
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