डीग, 22 दिसंबर। स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रहे संवैधानिक और व्यावहारिक प्रश्नों के समाधान की दिशा में राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने डीग जिले में अहम पहल की। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में गठित आयोग द्वारा सोमवार को डीग जिला मुख्यालय स्थित श्रीराम फार्म हाउस में जिला स्तरीय जनसंवाद एवं परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता की।

कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं एवं नगरीय निकायों में ओबीसी वर्ग के पिछड़ेपन की प्रकृति, उसकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की वास्तविकताओं का अनुभवजन्य अध्ययन करना रहा। आयोग के जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ के अनुसार, इस जनसंवाद में आयोग सदस्य प्रो. राजीव सक्सेना और गोपाल कृष्ण शर्मा ने डीग जिले के हितधारकों से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित कर जमीनी स्तर से जुड़े तथ्य, सुझाव और अभ्यावेदन संकलित किए। कार्यक्रम में डीग-कुम्हेर विधायक डॉ. शैलेश सिंह की विशेष उपस्थिति रही।

अध्यक्षीय संबोधन में आयोग सदस्य प्रो. राजीव सक्सेना ने स्पष्ट किया कि आयोग केवल औपचारिक ज्ञापन लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य सरकार को सौंपने के लिए एक ठोस, तथ्यपरक और विधिक रूप से सक्षम रिपोर्ट तैयार करना उसका मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों में ओबीसी वर्ग को संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर समुचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए ‘ट्रिपल टेस्ट’ की शर्तों के अनुरूप पूरे प्रदेश में तथ्यात्मक डेटा संकलित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में आरक्षण से जुड़े निर्णय न्यायिक कसौटी पर खरे उतर सकें।

परिचर्चा के दौरान जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने स्थानीय निकायों में जनसंख्या अनुपात के अनुरूप ओबीसी आरक्षण, चक्रानुक्रम रोस्टर प्रणाली की तर्कसंगतता तथा वार्ड-वार आरक्षण निर्धारण में सामने आ रही विसंगतियों को आयोग के समक्ष रखा। आयोग सदस्य गोपाल कृष्ण शर्मा ने आश्वस्त किया कि डीग जिले से प्राप्त सभी सुझावों और अभ्यावेदनों का गहन परीक्षण कर उन्हें अंतिम रिपोर्ट में समुचित स्थान दिया जाएगा।

विधायक डॉ. शैलेश सिंह ने आयोग के समक्ष डीग जिले की सामाजिक और भौगोलिक संरचना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण करते हुए कहा कि ग्रामीण बाहुल्य जिले में ओबीसी वर्ग की आबादी उल्लेखनीय है। ऐसे में परिसीमन और आरक्षण निर्धारण के दौरान अद्यतन जनसांख्यिकीय आंकड़ों को प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि जमीनी स्तर पर नेतृत्व के अवसर सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंच सकें।

बैठक में जिला प्रशासन की ओर से आयोग के प्रोटोकॉल के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। इस अवसर पर जिला प्रमुख, पंचायत समितियों के प्रधान, नगरीय निकायों के अध्यक्ष, जिला परिषद सदस्य, बार काउंसिल के प्रतिनिधि तथा ओबीसी कल्याण से जुड़े विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी प्राप्त अभ्यावेदनों को विधिवत सूचीबद्ध कर अध्ययन के लिए संकलित किया जाए। कार्यक्रम में मोहन सिंह जिला परिषद सदस्य, एडवोकेट करतार सिंह, पंचायत समिति सदस्य भगवान सिंह यदुवंशी, पार्षद राहुल लवानिया, भूरी सिंह फौजदार, पार्षद प्रतिनिधि बबलू गुर्जर, नगर परिषद आयुक्त कुलदीप सिंह सहित सैकड़ों जनप्रतिनिधि और समाजसेवी मौजूद रहे।

डीग में आयोजित यह जनसंवाद न केवल ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को मुखर मंच प्रदान करता है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि राज्य सरकार और आयोग जमीनी तथ्यों के आधार पर भविष्य की आरक्षण नीति को न्यायसंगत और संवैधानिक बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहे हैं।

Pratahkal Bureau

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