भुसावर। राजस्थान के भरतपुर जिले की भुसावर तहसील में इन दिनों सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ी खाई नजर आ रही है। पिछले कई दिनों से तहसील कार्यालय में पंजीयन और रजिस्ट्रेशन की आधिकारिक साइट तकनीकी खराबी के कारण पूरी तरह ठप पड़ी है। इस डिजिटल व्यवधान ने न केवल सरकारी कामकाज की गति को रोक दिया है, बल्कि दूर-दराज के गांवों से अपने राजस्व संबंधी कार्यों के लिए आने वाले काश्तकारों और किसानों के पसीने छुड़ा दिए हैं। आलम यह है कि सुबह से शाम तक दफ्तर के बाहर इंतजार करने के बाद भी सर्वर की सुस्ती के कारण किसानों को मायूस होकर खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है।

तहसील कार्यालय में अपने जरूरी कार्यों के लिए पहुंचे किसानों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि साइट न चलने की वजह से उनके जमीन संबंधी नामांतरण, पंजीयन और अन्य महत्वपूर्ण राजस्व कार्य अधर में लटके हुए हैं। किसानों का कहना है कि वे कई दिनों से लगातार दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें तकनीकी खराबी का हवाला देकर वापस भेज दिया जाता है। खेती-किसानी के व्यस्त समय में अपना काम छोड़कर तहसील आने वाले इन अन्नदाताओं के लिए यह स्थिति आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से परेशानी का सबब बनी हुई है। पंजीकरण प्रक्रिया ठप होने से न केवल व्यक्तिगत कार्य रुके हैं, बल्कि इससे जुड़े अन्य विधिक और वित्तीय लेनदेन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

इस गंभीर समस्या को देखते हुए क्षेत्र के काश्तकारों और किसानों ने स्थानीय प्रशासन के प्रति भारी रोष व्यक्त किया है। किसानों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस तकनीकी समस्या का तत्काल समाधान किया जाए और बंद पड़ी साइट को अविलंब शुरू करवाया जाए ताकि किसानों के रुके हुए कार्य समय पर पूरे हो सकें। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस डिजिटल विफलता को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक भुसावर के किसानों को इस कतार और इंतजार से मुक्ति मिलती है।

Pratahkal Bureau

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