देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को श्रीहरि जाएंगे 119 दिन की योगनिद्रा में, शुरू होगा चातुर्मास
25 जुलाई की देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू होगा। श्रीहरि 119 दिन की योगनिद्रा में रहेंगे और मांगलिक कार्यों पर विराम लगेगा। जानिए पूरे धार्मिक कार्यक्रम।

तस्वीर में मंदिर के गर्भगृह में शृंगारित और अलंकृत रूप में प्रतिष्ठित भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की प्रतिमाएं दिखाई दे रही हैं।
सनातन धर्म में आस्था और साधना के सबसे बड़े काल चातुर्मास का आरंभ 25 जुलाई शनिवार को देवशयनी एकादशी के साथ होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु सृष्टि के संचालन का दायित्व देवादिदेव महादेव को सौंपकर 119 दिनों यानी चार महीने के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाएंगे। इसके बाद 20 नवम्बर को देव उठनी एकादशी पर श्रीहरि पुनः जागृत होंगे और सृष्टि की सत्ता संभालेंगे। इसी के साथ विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत भी होगी।
देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। इस अवधि में विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे समस्त मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। विद्वान पंडितों के अनुसार इस वर्ष देवशयनी एकादशी अमृत योग, ब्रह्म योग और अनुराधा नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में मनाई जाएगी। इस दौरान श्रद्धालु पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत, दान और आध्यात्मिक साधना को विशेष महत्व देते हैं। इसके बाद बृहस्पति के पुण्य नक्षत्र में प्रवेश को धर्म, साधना और दान-पुण्य के लिए विशेष फलदायी माना गया है। चातुर्मास की यह अवधि 20 नवम्बर को देव उठनी एकादशी तक रहेगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के दौरान कुछ खाद्य पदार्थों का त्याग भी किया जाता है। इस अवधि में विशेष रूप से सावन माह में पालक, मेथी, चौलाई और सरसों जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन नहीं किया जाता। धार्मिक मान्यता के साथ-साथ वर्षा ऋतु में इनमें सूक्ष्म जीवों की संभावना अधिक रहने का भी उल्लेख किया जाता है। इसी प्रकार भाद्रपद माह में दही का सेवन त्याज्य माना गया है। इसके अलावा लहसुन और प्याज जैसे तामसिक खाद्य पदार्थों से भी परहेज करने की परंपरा है।
चातुर्मास के दौरान श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) में सावन सोमवार व्रत, हरियाली तीज, नाग पंचमी और रक्षाबंधन के पर्व मनाए जाएंगे। भाद्रपद (अगस्त-सितम्बर) में कजरी तीज, हरितालिका तीज, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और पितृपक्ष रहेंगे। इसके बाद आश्विन (सितम्बर-अक्टूबर) में शारदीय नवरात्रि और विजयादशमी का पर्व आएगा। वहीं कार्तिक (अक्टूबर-नवम्बर) में करवा चौथ, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज के पर्व मनाए जाएंगे। देव उठनी एकादशी पर श्रीहरि के जागृत होने के साथ ही चातुर्मास का समापन होगा और मांगलिक कार्यों का शुभारंभ पुनः किया जाएगा।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
