भरतपुर। सेवर पंचायत समिति के पुनर्गठन में सिनपिनी ग्राम पंचायत का नाम होने के बावजूद, नोटिफिकेशन में इसका उल्लेख नहीं होने से ग्रामीणों में व्यापक भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। इस उलझन को दूर करने और सिनपिनी को अलग ग्राम पंचायत घोषित करने की मांग को लेकर सोमवार को चार गांवों के ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर कमर चौधरी को ज्ञापन सौंपा।

ततामड़, मुड़ौता, सिनपिनी और थापर गांव के ग्रामीणों ने ज्ञापन में कहा कि सिनपिनी सभी आवश्यक नियम और शर्तें पूरी करता है, और पहले ही प्रस्ताव भेजा जा चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पंचायत समिति में सिनपिनी को शामिल किया गया है, तो ग्राम पंचायत के आधिकारिक नोटिफिकेशन में इसका नाम क्यों नहीं है, इस पर स्पष्टता नहीं मिल रही।

ग्रामीणों ने कलेक्टर से आग्रह किया कि सिनपिनी को अलग ग्राम पंचायत घोषित किया जाए, ताकि आने वाले समय में पंचायत संबंधी भ्रम और असमंजस की स्थिति समाप्त हो सके। उन्होंने बताया कि बिना स्पष्ट आदेश के गांववासियों में लगातार अनिश्चितता और प्रशासनिक सवाल उठते रहेंगे।

कुंवर सिंह, ततामड़ निवासी ग्रामीण प्रतिनिधि, ने बताया कि राज्य सरकार ने पंचायतों के पुनर्गठन के दौरान जनता और विधायक दोनों से प्रस्ताव प्राप्त किए थे। इसके बावजूद सिनपिनी को अलग ग्राम पंचायत का दर्जा नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने इसे प्रशासनिक असंगति बताया और इसके समाधान के लिए कलेक्टर से शीघ्र कार्रवाई की मांग की।

यह मामला केवल प्रशासनिक पुनर्गठन का नहीं, बल्कि स्थानीय शासन और ग्राम स्तर पर अधिकार सुनिश्चित करने का भी प्रतीक है। सिनपिनी को अलग पंचायत घोषित करने की मांग की पूरी कानूनी और प्रशासनिक मान्यता होने के कारण, इस पर सरकार की ओर से जल्द स्पष्ट निर्णय की प्रतीक्षा है।

Pratahkal Bureau

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