डीग, 11 दिसंबर। तालाबों में गंदे पानी के बहाव और मछलियों की मौत को लेकर गिरीश शर्मा, पूर्व जिला उपाध्यक्ष के नेतृत्व में जारी धरना 16वें दिन भी महिलाओं के समर्थन के साथ जारी रहा। गुरुवार को भी स्थानीय महिलाओं ने इस आंदोलन में भाग लेकर अपनी आवाज़ प्रशासन तक पहुँचाने का प्रयास किया।

धरने के दौरान गिरीश शर्मा ने बताया कि डीग शहर के लगभग 30 प्रतिशत घरों का गटर पानी सीधे तालाबों में जा रहा है। इसके अतिरिक्त, कई घरों में लैट्रिन टैंक नहीं बनवाए गए हैं, जिससे सीवेज का पानी भी सीधे तालाबों में गिरता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने अब तक उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलनकारियों को भूख हड़ताल और आत्महत्या जैसी कठिन कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी।

गिरीश शर्मा ने आगे कहा कि मलमास के महीने में 84 कोस परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु इन तालाबों में स्नान करते हैं और बदबूदार पानी ग्रहण करते हैं। इससे न केवल धार्मिक भावनाओं पर असर पड़ रहा है बल्कि जल महल और अन्य पर्यटन स्थलों पर आने वाले हजारों पर्यटकों का अनुभव भी प्रभावित हो रहा है। तालाबों में गंदे पानी और गटर के कारण मछलियों की मौत लगातार बढ़ रही है।

धरने में कमलेश, शंकुतला, सरोज, रजनी, देवी, गीता, त्रिवेणी और राजरानी सहित कई महिलाओं ने भाग लिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक गटर का पानी और घाटों की सफाई नहीं होती, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा। इस आंदोलन ने स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है, और नागरिकों की ओर से साफ-सुथरे जल स्रोतों की मांग को गंभीरता से लेने की आवश्यकता को उजागर किया है।

Pratahkal Bureau

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