डीग: श्री मंशाराम आदर्श विद्या मंदिर में 'सप्तशती संगम' के जरिए गूंजा नारी शक्ति का शंखनाद
डीग के खोह स्थित श्री मंशाराम आदर्श विद्या मंदिर में आयोजित 'सप्तशती संगम' मातृ सम्मेलन में उमड़ी नारी शक्ति। मुख्य वक्ता सरला गर्ग और अतिथि पूनम शर्मा ने महिलाओं को राष्ट्र निर्माण, संस्कार और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने का संदेश दिया। बबीता शुक्ला की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में नारी को समाज की शक्तिशाली इकाई के रूप में सशक्त करने पर बल दिया गया।

डीग। स्थानीय क्षेत्र के खोह स्थित श्री मंशाराम आदर्श विद्या मंदिर के प्रांगण में मंगलवार को 'सप्तशती संगम' मातृ सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केवल महिलाओं का एकत्रीकरण मात्र नहीं था, बल्कि राष्ट्र निर्माण में नारी की महत्ता को रेखांकित करने वाला एक वैचारिक कुंभ सिद्ध हुआ। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा मां शारदे के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक और ऊर्जावान आभा से ओतप्रोत हो उठा।
सम्मेलन की मुख्य वक्ता श्रीमती सरला गर्ग ने अपने ओजस्वी संबोधन में आधुनिक परिवेश में महिलाओं की भूमिका पर गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने आह्वान किया कि आज के समय में भारतीय नारी को अपनी सुप्त आंतरिक शक्तियों को पुनर्जीवित करने की महती आवश्यकता है। उन्होंने ज्ञान, सेवा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रभक्ति जैसे पांच स्तंभों पर बल देते हुए कहा कि जब तक महिलाएं इन मूल्यों के प्रति जागरूक नहीं होंगी, तब तक एक सशक्त समाज और राष्ट्र की परिकल्पना अधूरी है। उनके अनुसार, परिवार की धुरी होने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण के यज्ञ में महिलाओं की आहुति अनिवार्य है।
विशिष्ट अतिथि पूनम शर्मा ने 'नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है' के उद्घोष के साथ उपस्थित मातृशक्ति में जोश भर दिया। उन्होंने अनुशासन और राष्ट्र प्रेम को जीवन का मूल मंत्र बताते हुए कहा कि देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला रखने में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी अपरिहार्य है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही श्रीमती बबीता शुक्ला ने अपने संबोधन में 'सप्त शक्ति संगम' की अवधारणा को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह मंच भारतीय नारी को महज एक गृहिणी की रूढ़िवादी छवि से बाहर निकालकर उसे समाज में परिवर्तन लाने वाली एक शक्तिशाली और स्वतंत्र इकाई के रूप में स्थापित करने का माध्यम है।
इस गरिमामय अवसर पर कमलेश, फूलवती, सविता, वेजयंती और धर्मवती सहित क्षेत्र की अनेक गणमान्य महिलाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे आयोजनों से न केवल सामाजिक समरसता बढ़ती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुसंस्कृत मार्ग भी प्रशस्त होता है। यह सम्मेलन नारी शक्ति के उस स्वरूप को समर्पित रहा जो घर की दहलीज से लेकर राष्ट्र की सीमाओं तक अपनी छाप छोड़ने के लिए तत्पर है।

Pratahkal Bureau
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