डीग: श्रीमद्भागवत कथा में कृष्ण-सुदामा की अटूट मित्रता का हुआ वर्णन
पुरानी डीग में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कथा व्यास महेश माधव ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के निस्वार्थ प्रेम और भावुक मिलन के प्रसंग को विस्तार से सुनाया।

निस्वार्थ प्रेम और अटूट मित्रता का संदेश
कथा के दौरान महाराज जी ने बताया कि:
- श्री कृष्ण-सुदामा की मित्रता निस्वार्थ प्रेम, भक्ति और समानता का सर्वोच्च उदाहरण है।
- निर्धन अवस्था में पत्नी के आग्रह पर सुदामा अपने बालसखा द्वारकाधीश श्री कृष्ण से मिलने गए।
भावुक कर देने वाला मिलन प्रसंग
जब मित्र के आने का समाचार भगवान को प्राप्त हुआ, तो दृश्य अत्यंत हृदयस्पर्शी था। कथा व्यास के अनुसार:
"जब मित्र को पता चला तो श्रीकृष्ण भगवान मित्र से मिलने नंगे पांव चलकर आये और सुदामा को गले से लगाया।"
भक्तों की भक्तिमय उपस्थिति
इस प्रसंग को सुनकर सैकड़ों भक्त भक्तिभाव में डूब गए। पूरी कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान की लीलाओं का रसपान करते हुए भावुक नजर आए।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
