डीग: जलमहलों की अस्मिता बचाने को अर्धनग्न प्रदर्शन, 46वें दिन भी जारी रहा जन-आंदोलन
डीग में ऐतिहासिक जलमहलों और सरोवरों को गटर के पानी से बचाने के लिए गिरीश शर्मा के नेतृत्व में 46वें दिन अर्धनग्न प्रदर्शन किया गया। बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ आंदोलनकारियों ने अब भूख हड़ताल और आत्मदाह की चेतावनी दी है। जानिए कैसे गंदगी की भेंट चढ़ रही है डीग की विरासत और क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें।

डीग (भरतपुर)। राजस्थान के ऐतिहासिक शहर डीग में अपनी विरासत और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए चल रहा संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर आ गया है। पूर्व जिला उपाध्यक्ष युवा मोर्चा (भाजपा) गिरीश शर्मा के नेतृत्व में तालाबों की दुर्दशा और घाटों की सफाई की मांग को लेकर चल रहा धरना शनिवार को 46वें दिन में प्रवेश कर गया। इस मौके पर आंदोलनकारियों ने प्रशासन की कुंभकर्णी नींद तोड़ने के लिए अर्धनग्न होकर उग्र प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन आत्मदाह जैसे कठोर कदम तक जा सकता है।
आंदोलन की कमान संभाल रहे गिरीश शर्मा ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जिन तालाबों और सरोवरों के कारण डीग को 'जलमहलों की नगरी' के रूप में विश्व पटल पर पहचान मिली है, आज प्रशासन की अनदेखी के कारण वे गटर के टैंक में तब्दील हो चुके हैं। शहर के लगभग 30 प्रतिशत घरों का सीवेज और लैट्रिन का गंदा पानी बिना किसी उपचार के सीधे इन ऐतिहासिक सरोवरों में गिर रहा है। स्थिति इतनी भयावह है कि श्रद्धालु, जो 84 कोस की परिक्रमा के दौरान आस्था के साथ इन तालाबों में स्नान करते हैं, वे अनजाने में बदबूदार और दूषित जल ग्रहण करने को मजबूर हैं। यह न केवल धार्मिक भावनाओं का अपमान है, बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ भी बड़ा खिलवाड़ है।
ऐतिहासिक पक्ष को उजागर करते हुए शर्मा ने बताया कि करीब डेढ़ दशक पहले तक गोपाल सागर और रूप सागर का जल इतना शुद्ध था कि उससे रंगीन फव्वारे चलाए जाते थे। लेकिन वर्तमान में ये सरोवर इतने प्रदूषित हो चुके हैं कि पुरातत्व विभाग को फव्वारे चलाने के लिए जल विभाग की टंकी से अलग पाइपलाइन लेनी पड़ी है। प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि गंदे पानी की निकासी का कोई ठोस प्रबंध न होने के कारण सारा अपशिष्ट जल या तो जलमहलों के सरोवरों में जा रहा है या ऐतिहासिक किले की खाई में। यदि यही स्थिति रही, तो जल्द ही डीग के महल और किला गंदे पानी के स्टोरेज मात्र बनकर रह जाएंगे।
एक तरफ जहां पुरातत्व विभाग स्मारकों के आसपास निर्माण करने वालों को नोटिस देकर सख्ती दिखाता है, वहीं पिछले दो दशकों से गुलाब बाग और अन्य ऐतिहासिक स्थलों में समा रहे गटर के पानी पर मौन साधे हुए है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक गटर के पानी का स्थायी समाधान और घाटों की पूर्ण सफाई नहीं होती, तब तक यह आमरण अनशन और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। शनिवार को हुए इस प्रदर्शन के दौरान गिरीश शर्मा के साथ गोपाल पण्डित, मनीषा, रघुवीर, सचिन, फत्ते, नवल सिंह वहज और राजेश वहज सहित अनेक स्थानीय निवासी मौजूद रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से प्रशासन के विरुद्ध हुंकार भरी।

Pratahkal Bureau
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