डीग। राजस्थान के डीग जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पिछले दस महीनों से अपने हक की राशि के लिए बाट जोह रहे राशन डीलरों के सब्र का बांध सोमवार को आखिरकार टूट गया। जिला राशन डीलर संघ के जिलाध्यक्ष देशराज सिनसिनी के नेतृत्व में लामबंद हुए डीलरों ने जिला रसद अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनका बकाया भुगतान जल्द नहीं हुआ, तो वे खाद्यान्न से भरी गाड़ियों को खाली नहीं करेंगे। यह गतिरोध जिले के हजारों गरीब परिवारों के निवाले पर भारी पड़ सकता है।

मामले की जड़ में 'बजरंग ट्रेडिंग कंपनी' द्वारा पिछले दस माह से अटकाया गया गेहूं की उतराई का पैसा है। डीलरों का आरोप है कि कंपनी ने पिछले महीने भुगतान का पुख्ता वादा किया था, लेकिन वह महज एक खोखला आश्वासन साबित हुआ। राशन डीलरों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनके पसीने की कमाई का एक-एक पैसा नहीं मिल जाता, तब तक गेहूं की गाड़ियां खड़ी रहेंगी। यदि दो दिनों के भीतर समाधान नहीं निकला, तो समस्त डीलर उग्र आंदोलन की राह पकड़ेंगे। राशन डीलरों के इस कड़े रुख से जिले की खाद्य सुरक्षा प्रणाली पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गई है, जिसका सीधा असर उन गरीब लाभार्थियों पर पड़ेगा जो सरकारी राशन पर निर्भर हैं।

ज्ञापन सौंपने के दौरान जिलाध्यक्ष देशराज सिनसिनी के साथ ब्लॉक अध्यक्ष रामजीत पटेल, कोषाध्यक्ष योगेश गोयल, प्रदीप कसौट, देवेंद्र बड़नगढ़, कृष्णा उसरानी और ओमप्रकाश बंधा सहित बड़ी संख्या में राशन डीलर मौजूद रहे। डीलरों ने प्रशासन को आगाह किया है कि इस विवाद के चलते होने वाली किसी भी असुविधा या अव्यवस्था की पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित कंपनी और विभाग की होगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस अल्टीमेटम के बाद हरकत में आता है या फिर डीग जिले के गरीबों को अपने राशन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

Pratahkal Bureau

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