डीग: मनरेगा के वजूद पर संकट, कामां में 'मनरेगा बचाओ जन संग्राम' के जरिए कांग्रेस ने फूंका चुनावी बिगुल
डीग जिले के कामां में कांग्रेस ने 'मनरेगा बचाओ जन संग्राम आंदोलन' के जरिए केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मंत्री जाहिदा खान और जिलाध्यक्ष राजीव सिंह चौधरी ने ग्राम पंचायतों में चौपाल लगाकर मनरेगा बजट में कटौती और हाजिरी ऐप की समस्याओं पर ग्रामीणों को जागरूक किया। इस रिपोर्ट में जानें कैसे मनरेगा के बदलते नियम ग्रामीणों की आजीविका पर संकट बन रहे हैं।

डीग। राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में मनरेगा श्रमिकों के हक और वजूद को बचाने के लिए कांग्रेस ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। डीग जिले के कामां विधानसभा क्षेत्र में 'मनरेगा बचाओ जन संग्राम आंदोलन' के तहत उमड़ी ग्रामीणों की भीड़ ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ भारी आक्रोश व्यक्त किया। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार आयोजित इस जन संवाद कार्यक्रम का नेतृत्व जिला अध्यक्ष राजीव सिंह चौधरी और पूर्व राज्य मंत्री श्रीमती जाहिदा खान ने किया। गोपालगढ़, खेड़ली नऊआबद, लड़मका, सोतहल्ला, जोतरी पीपल और ब पापडा जैसी ग्राम पंचायतों की चौपालों पर जब कांग्रेस नेताओं ने मजदूरों के हक की आवाज बुलंद की, तो ग्रामीणों का दर्द छलक पड़ा। नेताओं ने स्पष्ट किया कि जिस मनरेगा ने कोरोना काल में देश की अर्थव्यवस्था को टूटने से बचाया और ग्रामीणों के पलायन को रोका, आज केंद्र की भाजपा सरकार उसी की नींव खोदने में लगी है।
इस आंदोलन के दौरान पूर्व मंत्री जाहिदा खान और राजीव सिंह चौधरी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया यह ऐतिहासिक कानून अब अपने मूल स्वरूप से भटक रहा है। वक्ताओं ने तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मनरेगा के तहत 15 दिनों में रोजगार की वैधानिक गारंटी और बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान था, लेकिन अब नए नियमों के जरिए इस पूरे ढांचे को ध्वस्त किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों की शक्तियों को छीनकर ठेकेदारों को सौंपने की साजिश रची जा रही है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि केंद्र सरकार ने अपने अंशदान को 90 प्रतिशत से घटाकर मात्र 60 प्रतिशत कर दिया है, जिससे राजस्थान जैसी राज्य सरकारों पर भारी आर्थिक बोझ आ पड़ा है। वक्ताओं ने डेटा साझा करते हुए बताया कि जहां केंद्र का अनुमानित राजस्व 48 लाख करोड़ है, वहीं राजस्थान 7.50 लाख करोड़ के कर्ज तले दबा है, ऐसे में केंद्र द्वारा मनरेगा के बजट में कटौती करना गरीबों के पेट पर लात मारने जैसा है।
चौपालों पर चर्चा के दौरान मोबाइल ऐप के जरिए हाजिरी लगाने की व्यवस्था पर भी तीखा प्रहार किया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि दिनभर हाड़-तोड़ मेहनत करने वाला मजदूर अब नेटवर्क और ऐप की खामियों के कारण घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर है, जिससे वह खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। राजस्थान में बढ़ती बेरोजगारी के आंकड़ों (65 लाख बेरोजगार) का हवाला देते हुए जिला अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि यदि सरकार की नीयत साफ हो तो कामां और पहाड़ी जैसे क्षेत्रों में एनसीआर मापदंडों के तहत मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, डेयरी प्लांट और जरी उद्योग लगाकर बेरोजगारी दूर की जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास के बजाय सांप्रदायिकता के आधार पर बांटकर सत्ता हासिल करना चाहती है।
इस विशाल जन संग्राम और चौपाल आयोजनों में क्षेत्र के प्रमुख कांग्रेसियों की उपस्थिति रही, जिनमें श्रीमती जाहिदा खान पूर्व मंत्री, फ़ज्जर खा, ब्लॉक अध्यक्ष देवेंद्र सिंह, पीसीसी सदस्य जलीश खान, मुबीन प्रधान, बलवीर वकील, डॉ. मोहन सिंह, कच्ची बस्ती प्रकोष्ठ अध्यक्ष राजेश मीणा, पर्यावरण प्रकोष्ठ महामंत्री प्रेम सिंह प्रजापत, जिला परिषद सदस्य मोहन सिंह, राजीव गांधी ब्रिगेड के राष्ट्रीय सचिव राजकुमार कटहरा, गजराज पैंगोर, अनुराग पला, नंदकिशोर सिनसिनवार बैलारा, वीरेंद्र सिंह, छोटू पैंगोर, सुजान सिंह, धर्मेंद्र पेंघोर, मानसिंह उबार, नरेंद्र चक मीणा, सुशील कुमार, भूरा पला, जैकम हलीम, शरीफ खान, मिस्लु सरपंच, पूरन सिंह बडेसरा और गोपाल लवानिया पेंघोर प्रमुख रूप से शामिल थे। कांग्रेस का यह आंदोलन अब गांव-गांव की गलियों तक पहुंच चुका है, जो आने वाले समय में एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत दे रहा है।

Pratahkal Bureau
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