डीग के लक्ष्मण मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा और कलश यात्रा का आयोजन
ऐतिहासिक लक्ष्मण मंदिर में 21 से 28 फरवरी तक आयोजित होने वाले इस ज्ञान यज्ञ में पूज्य पंडित मुरारी लाल पाराशर द्वारा कथा का वाचन किया जाएगा।

आयोजन की पृष्ठभूमि और सानिध्य
- आचार्य पंडित गणेश दत्त पाराशर ने बताया कि "श्री श्री 1008 साकेतवासी बाबा श्री राम मनोहर दास जी महाराज पान्हौरी वाले के द्वारा प्रारंभ की गई एवं उन्ही के शिष्य श्री श्री 108 शिवराम दास जी महाराज के सानिध्य में भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है।"
कथा वाचक और समय सारणी
कथा का रसपान लक्ष्मण मंदिर के महंत कथा वाचक पूज्य पंडित मुरारी लाल पाराशर की अमृतमयी वाणी से होगा।
पाराशर ने समय के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि:
- प्रातः 8:00 बजे से 11:00 तक: मूलपाठ
- दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 तक: कथा का आयोजन
कलश यात्रा का कार्यक्रम
पाराशर के अनुसार 21 फरवरी को दोपहर 3:00 बजे मंदिर प्रांगण से कलश यात्रा निकाली जाएगी।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
