जनूथर में बंदरों का आतंक, ग्रामीणों ने दी आमरण अनशन की चेतावनी
तहसील मुख्यालय पर बंदरों के हमले से दर्जनों लोग घायल, प्रशासन की निष्क्रियता के खिलाफ भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा ने 10 दिन का अल्टीमेटम दिया।

डीग 23 अप्रैल। तहसील मुख्यालय जनूथर में बंदरों की संख्या दिन प्रतिदिन सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही है, जिससे जन जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। आम जनता बंदरों के आतंक से बेहद परेशान है और आए दिन दर्जनों लोगों को बंदर अपना शिकार बना रहे हैं। सैकड़ों की संख्या में महिला, पुरुष, बुजुर्ग और छोटे बच्चों को घायल किया जा चुका है।
स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि यहां के बाशिंदे बंदरों के काटने के डर से छतों पर नहीं जाते और न ही कपड़े सुखा पाते हैं। छत पर कपड़े सुखाते ही बंदर उन्हें ले जाकर फाड़ देते हैं। लगातार बढ़ते हमलों के कारण आमजन भयभीत है और क्षेत्र की जनता नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो गई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन कुंभकरणी नींद में खर्राटे ले रहा है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि डबल इंजन की भाजपा सरकार में कोई सुनने वाला नहीं है, या यूं कहें कि जिला प्रशासन पर कोई अंकुश नहीं है।
भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रभान गुप्ता ने चेतावनी दी है कि यदि 10 दिन के भीतर जिला प्रशासन ने बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई नहीं की, तो 10 दिन बाद ग्रामीणों के साथ समस्या के समाधान तक आमरण अनशन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान होने वाले समस्त हरजे-खर्च की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और राज्य सरकार की होगी।
शिकायतकर्ता महिलाओं में कमलेश, अंजलि, बबीता, दयावती, हरप्यारी, सुनीता, विनीता, फूलवती, मीनाक्षी, काजल, सुखवंती, हरबती, सनम प्रिया, कमलेश, कामिनी, जय देवी, कांता, काजल सहित कई दर्जन महिलाओं ने प्रशासन को कोसा है।
बढ़ते बंदर आतंक और प्रशासनिक निष्क्रियता के बीच जनूथर की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जहां आमजन सुरक्षा और राहत की मांग को लेकर अब निर्णायक कदम उठाने की चेतावनी दे रहे हैं।

Pratahkal Bureau
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