डीग: जनूथर में 28 साल से पेयजल संकट, नई पानी की टंकी बनी शो पीस
जनूथर कस्बे में 2023 में बनी टंकी से कनेक्शन नहीं होने पर ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन और आमरण अनशन की चेतावनी।

डीग जिले के जनूथर कस्बे में नवनिर्मित पानी की टंकी से कनेक्शन शुरू करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करते स्थानीय निवासी।
डीग, 21 अप्रैल। राजस्थान के डीग जिले के तहसील मुख्यालय जनूथर में पेयजल संकट की स्थिति सरकारी तंत्र की विफलता और विभागीय उदासीनता की पराकाष्ठा बन गई है। इस समस्या की जड़ें अगस्त 1998 में जाती हैं, जब जलदाय विभाग के तत्कालीन मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता सांभरमल जाट ने जनूथर के युवा भाजपा नेता एवं तत्कालीन पंचायत समिति सदस्य सतीश बंसल के अथक प्रयासों के बाद 36 लाख रुपये की जल परियोजना स्वीकृत की थी। इस योजना का लक्ष्य कस्बे के हर घर तक पानी पहुंचाना था, लेकिन विडंबना यह है कि लगभग 28 साल बीत जाने के बाद भी आज कस्बे की आधी आबादी पानी की बूंद-बूंद को तरस रही है।
लंबे आंदोलन और कड़े संघर्ष के बाद कस्बे के कुछ हिस्सों में पानी तो पहुंचा, लेकिन पूर्ण समाधान अब भी कोसों दूर है। पेयजल की इसी विकट समस्या को लेकर जनवरी 2021 में भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रभान गुप्ता ने नौ दिनों तक आमरण अनशन किया था। उस दौरान पूर्व कैबिनेट मंत्री महाराजा विश्वेन्द्र सिंह ने राज्य सरकार से वार्ता कर ठोस आश्वासन देकर अनशन तुड़वाया था, जिसके फलस्वरूप समस्या के समाधान हेतु करोड़ों रुपये स्वीकृत हुए। इसी क्रम में वर्ष 2023 में कुम्हेर रोड जनूथर पर एक विशाल पानी की टंकी का निर्माण भी किया गया, किंतु विडंबना यह है कि तीन साल बीतने को हैं और यह टंकी महज एक 'शो पीस' बनी हुई है।
जलदाय विभाग ने अब तक इस टंकी से कनेक्शन चालू नहीं किए हैं, जिससे जनता में भारी आक्रोश है। स्थानीय निवासियों और प्रतिनिधियों द्वारा विभाग के अधिकारियों को अनेकों पत्र लिखे जा चुके हैं, परंतु बदले में केवल झूठे आश्वासन ही प्राप्त हुए हैं। जलदाय विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इस गंभीर स्थिति में भी कुंभकरणी नींद सो रहे हैं। अब क्षेत्र की जनता ने चेतावनी दी है कि यदि 10 दिनों के भीतर पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ और कनेक्शन चालू नहीं किए गए, तो "सड़क से लेकर संसद तक" उग्र संघर्ष किया जाएगा। भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रभान गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि विभाग की हठधर्मिता के कारण वे ग्रामीणों के साथ पुनः आमरण अनशन पर बैठने को विवश होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी जलदाय विभाग और प्रशासन की होगी।

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