जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीग) के अध्यक्ष हेमराज गौड़ के निर्देशन में सोमवार को जिला कारागृह डीग का औचक निरीक्षण किया गया। यह महत्वपूर्ण निरीक्षण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव (अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश) राम किशन शर्मा द्वारा अचानक अंजाम दिया गया, जिससे कारागृह प्रशासन में हड़कंप मच गया। इस औचक कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य जेल की आंतरिक व्यवस्थाओं को परखना और बंदियों के मानवाधिकारों की सुदृढ़ता सुनिश्चित करना था।

निरीक्षण के दौरान सचिव राम किशन शर्मा ने कारागृह की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का गहन जायजा लिया। उन्होंने बैरकों में जाकर बंदियों से सीधे मुखातिब होते हुए संवाद स्थापित किया। इस सीधे संवाद के दौरान बंदियों के स्वास्थ्य, उन्हें मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, जेल परिसर की स्वच्छता प्रबंधन तथा सबसे महत्वपूर्ण—निःशुल्क विधिक सहायता की उपलब्धता के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की गई। बंदियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उन्होंने कारागृह प्रशासन को मानवाधिकारों के पूर्ण संरक्षण और स्वच्छता मानकों को उच्च स्तर पर बनाए रखने के कड़े एवं स्पष्ट निर्देश जारी किए।

कानूनी सहायता की जमीनी हकीकत जानने के लिए जिला कारागृह में संचालित लीगल एड क्लीनिक एवं लीगल एड हैल्प डेस्क का भी विशेष रूप से निरीक्षण किया गया, ताकि कोई भी बंदी विधिक सहायता से वंचित न रहे। जेल व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और बंदियों को न्याय सुलभ कराने के संकल्प के साथ किए गए इस औचक निरीक्षण के दौरान लीगल एड डिफेंस काउंसिल के चीफ विनोद कुमार शर्मा, डिप्टी चीफ राजेन्द्र कुमार शर्मा तथा असिस्टेंट सौना गौतम भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। यह निरीक्षण कारागृह प्रबंधन में पारदर्शिता और बंदियों के कल्याण की दिशा में एक बड़ा और प्रभावी कदम साबित होगा।

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