डीग: किले पर ₹50 टिकट और खाई की बदहाली के खिलाफ प्रदर्शन
पूर्व जिला उपाध्यक्ष गिरीश शर्मा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ₹50 का प्रवेश शुल्क हटाने और ऐतिहासिक खाई के सौंदर्यीकरण के साथ नौकायन शुरू करने की मांग की।

राजस्थान के डीग जिले में ऐतिहासिक विरासत की अनदेखी और मनमाने टिकट शुल्क को लेकर स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। सोमवार को पूर्व जिला उपाध्यक्ष युवा मोर्चा गिरीश शर्मा के नेतृत्व में नागरिकों ने डीग के चारों ओर स्थित ऐतिहासिक खाई की बदहाली और किले पर थोपे गए शुल्क के विरुद्ध जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जलमहल और किले की दुर्दशा पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया।
गिरीश शर्मा ने विरोध प्रदर्शन के दौरान बताया कि डीग की पहचान मानी जाने वाली ऐतिहासिक खाई वर्तमान में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। यह खाई गंभीर जल प्रदूषण, कचरे के ढेरों और दलदल की समस्या से बुरी तरह जूझ रही है। गंदगी के कारण उठने वाली दुर्गंध ने न केवल स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है, बल्कि यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह एक कड़वा अनुभव साबित हो रही है। शर्मा ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि किले के भीतर न तो कोई म्यूजियम है और न ही कोई विशेष आकर्षण, इसके बावजूद प्रशासन ने ₹50 का प्रवेश शुल्क लगा दिया है, जो पूरी तरह अनुचित है।
विरोध का मुख्य स्वर इस बात पर भी रहा कि सुबह भ्रमण के लिए आने वाले स्थानीय लोगों और प्रसिद्ध सेड माता के दर्शन हेतु आने वाली महिलाओं से भी यह टिकट वसूला जा रहा है, जिससे धार्मिक भावनाओं और दैनिक दिनचर्या पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। गिरीश शर्मा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र प्रेषित कर मांग की है कि इस अव्यावहारिक टिकट शुल्क को तत्काल हटाया जाए। साथ ही, उन्होंने खाई के सौंदर्यीकरण, नियमित सफाई और उसमें नौकायन (बोट) शुरू करने का प्रस्ताव रखा है ताकि इसे पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि म्यूजियम जैसी मूलभूत सुविधाएं होने पर ही शुल्क का औचित्य बनता है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सुनील खंडेलवाल, यश शर्मा, रौनक और निशांत शर्मा सहित कई स्थानीय लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में डीग की ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की अपील की है।

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