डीग के किसान केसरी सिंह ने जैविक खेती और केंचुआ खाद से बढ़ाया मुनाफा
बिलौंद निवासी केसरी सिंह राठौर ने परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत केंचुआ खाद अपनाकर फसल उत्पादन और अपनी आय में वृद्धि की है।

डीग जिले के ग्राम बिलौंद निवासी प्रगतिशील किसान केसरी सिंह राठौर, जिन्होंने जैविक खाद के उपयोग से अपनी कृषि आय में सुधार किया है।
डीग, 02 मई। प्रदेश में कृषकों को जैविक खेती की ओर प्रेरित करने और कृषि क्षेत्र को उन्नत स्वरूप प्रदान करने के सरकारी संकल्प अब धरातल पर लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं। इसी कड़ी में डीग जिले के ग्राम बिलौंद निवासी प्रगतिशील कृषक केसरी सिंह राठौर ने जैविक खेती को अपनाकर क्षेत्र के अन्य काश्तकारों के समक्ष सफलता का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। राठौर द्वारा परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत केंचुआ खाद निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया, जिसके लिए विभाग द्वारा उन्हें नियमानुसार अनुदान राशि भी स्वीकृत की गई।
रासायनिक खादों के घातक प्रभाव को त्याग कर केसरी सिंह ने स्वयं द्वारा निर्मित उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद का उपयोग कर अपने खेतों को पूर्णतः ऑर्गेनिक बनाया। इस पर्यावरण-अनुकूल नवाचार के परिणामस्वरूप न केवल भूमि की उर्वरक क्षमता और मिट्टी की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार परिलक्षित हुआ, बल्कि फसल उत्पादन में भी आशातीत वृद्धि दर्ज की गई। उत्कृष्ट श्रेणी के उत्पादन और गुणवत्तापूर्ण फसल के चलते कृषक को पहले के मुकाबले कहीं बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति अब अत्यंत सुदृढ़ हो गई है।
अपनी इस सफलता से उत्साहित कृषक केसरी सिंह राठौर ने कृषि क्षेत्र में संवेदनशीलता दिखाने और समयबद्ध आर्थिक संबल प्रदान करने हेतु भारत सरकार तथा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार का हृदय से आभार ज्ञापित किया है। उन्होंने महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में ऐसे नवाचारों को निरंतर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे अधिक से अधिक किसान इन लाभकारी योजनाओं से जुड़कर लाभान्वित हो सकें। यह पहल न केवल किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि प्रदेश के अन्नदाता को सशक्त करने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगी।

