डीग की बदहाल विद्युत व्यवस्था पर महिला कांग्रेस का हल्ला बोल: सीएमडी आरती डोगरा को सौंपा ज्ञापन
डीग में बिजली की बदहाल व्यवस्था और अघोषित कटौती से परेशान जनता की आवाज बनकर महिला कांग्रेस उतरी मैदान में। क्या अब सुधरेगा जिला प्रशासन? सीएमडी को सौंपे गए ज्ञापन में छिपे हैं कई गंभीर खुलासे। जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर।

डीग जिले में व्याप्त भीषण विद्युत संकट और बुनियादी ढांचे की बदहाली को लेकर अब जनप्रतिनिधियों का आक्रोश सड़कों पर उतर आया है। इसी क्रम में महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष एडवोकेट श्वेता यादव ने बिजली विभाग की सीएमडी आरती डोगरा को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर जिले की चरमराई बिजली व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया है। यह कदम स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी राहत की उम्मीद जगाता है, जो लंबे समय से जर्जर लाइनों, अघोषित बिजली कटौती और कम वोल्टेज जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
एडवोकेट श्वेता यादव ने ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट किया कि डीग के ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने विशेष रूप से सीकरी में स्वीकृत 220 केवी जीएसएस का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसे मंजूरी मिलने के बावजूद इसकी सप्लाई आज तक शुरू नहीं की गई है, जिससे मौजूदा 132 केवी जीएसएस पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। इस केंद्र पर कई मशीनें पहले से ही खराब पड़ी हैं, जिससे स्थिति और भी विकट हो गई है। उन्होंने बताया कि जर्जर विद्युत लाइनों और खंभों का जाल आमजन के लिए जानलेवा साबित हो रहा है, जबकि खराब ट्रांसफार्मरों के चलते किसानों की फसलें और व्यापारियों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
ज्ञापन में प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करते हुए यह भी उल्लेख किया गया कि डीग जिले में पर्याप्त मिनिस्ट्री स्टाफ मौजूद होने के बावजूद तकनीकी कर्मचारियों को स्टोर और सीसी सेक्शन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में तैनात किया गया है, जो नियमों के विरुद्ध है। एडवोकेट यादव ने विभाग से मांग की है कि पूरे जिले में तकनीकी सर्वे करवाकर विद्युत ढांचे को मजबूत किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली अघोषित बिजली कटौती पर तत्काल रोक लगाई जाए और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए।
इस संघर्षपूर्ण पहल का समापन करते हुए एडवोकेट श्वेता यादव ने विभाग को चेतावनी दी कि उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए एक प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों से आमजन की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता अपनाने की अपील की है। अब देखना यह है कि सीएमडी स्तर पर दिए गए इस ज्ञापन के बाद डीग के निवासियों को अंधेरे से मुक्ति कब तक मिलती है, क्योंकि यह केवल बिजली का मुद्दा नहीं, बल्कि जिले के हजारों परिवारों के सम्मान और सुरक्षा का सवाल है।

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