डीग, 17 अप्रैल। जिले में शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को मजबूत करने और मूलभूत सुविधाओं की धरातली स्थिति परखने के उद्देश्य से जिला कलेक्टर मयंक मनीष ने शुक्रवार को कड़े तेवर दिखाए। कलेक्टर ने पंचायत समिति कुम्हेर के अंतर्गत पीएम श्री राजकीय विद्यालय हेलक एवं स्थानीय आंगनवाड़ी केंद्र का सघन औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने न केवल विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और भौतिक बुनियादी ढांचे का सूक्ष्म जायजा लिया, बल्कि पोषाहार व्यवस्था की शुचिता की भी जांच की और प्रशासनिक तंत्र को व्यवस्थाएं सुदृढ़ करने हेतु कड़े दिशा-निर्देश जारी किए।

निरीक्षण की शुरुआत में जिला कलेक्टर सीधे कक्षा-कक्षों में पहुंचे और विद्यार्थियों के बीच बैठकर उनसे सीधा संवाद स्थापित कर उनके ज्ञान का परीक्षण किया। उन्होंने 11वीं कक्षा की एक छात्रा से त्रिकोणमिति के जटिल प्रश्न पूछे, जिसका सटीक उत्तर मिलने पर उन्होंने गहरी संतुष्टि व्यक्त की। इसी क्रम में उन्होंने कृषि संकाय के एक छात्र से अंग्रेजी का पठन करवाया और प्राथमिक कक्षाओं के नौनिहालों से गिनती सुनकर उनकी दक्षता जांची। विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और त्वरित उत्तरों से प्रभावित होकर कलेक्टर ने विद्यालय के शैक्षणिक स्तर की मुक्तकंठ से सराहना की। विद्यालय प्रशासन ने उन्हें अवगत कराया कि पीएम श्री स्कूल हेलक में अब तक 376 विद्यार्थियों का नामांकन हो चुका है और प्रवेश प्रक्रिया निरंतर जारी है। कलेक्टर ने प्रार्थना सभा के आयोजन स्थल की जानकारी ली, जिस पर उन्हें बताया गया कि इसका आयोजन विद्यालय के सुरम्य गार्डन में किया जाता है।

व्यवस्थाओं की पड़ताल करते हुए जिला कलेक्टर ने मिड-डे मील व्यवस्था का भौतिक सत्यापन किया। उन्होंने खाद्यान्न भंडारण कक्ष में आटे और अन्य खाद्य सामग्रियों की उपलब्धता और गुणवत्ता की जांच की। विद्यालय परिसर में विकसित किचन गार्डन में अरबी, पुदीना, पालक और हल्दी के लहलहाते पौधों को देखकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि ऐसी पहल से विद्यार्थियों को जैविक व पोषक आहार उपलब्ध होगा। इसके पश्चात उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र में वितरित होने वाले पोषाहार की गुणवत्ता को भी बारीकी से परखा।

निरीक्षण के दौरान जहां शैक्षणिक उपलब्धियां बेहतर मिलीं, वहीं कुछ ढांचागत खामियां भी उजागर हुईं, जिन्हें कलेक्टर ने गंभीरता से लिया। विद्यालय की टूटी हुई दीवारों की तत्काल मरम्मत के लिए उन्होंने विकास अधिकारी को निर्देशित किया। शौचालय परिसरों में स्वच्छता के मानकों को और अधिक सख्त करने तथा प्रयोगशाला व पुस्तकालय को पूर्णतः क्रियाशील बनाने हेतु मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी एवं संस्था प्रधान को पाबंद किया गया। खेल मैदान पर अतिक्रमण की शिकायत मिलते ही उन्होंने तहसीलदार कुम्हेर को नियमानुसार तत्काल कार्यवाही कर मैदान को अतिक्रमण मुक्त कराने के निर्देश दिए। साथ ही, जिला शिक्षा अधिकारी को निर्माणाधीन नवीन कक्षों का कार्य शीघ्र पूर्ण कराने को कहा ताकि विद्यार्थियों को बैठने में असुविधा न हो। अनुशासन के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित मिले कार्मिकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। जिला कलेक्टर के इस सघन निरीक्षण ने स्पष्ट कर दिया है कि जिले की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी।

Pooran Prakash Bansal, Deeg

Pooran Prakash Bansal, Deeg

नाम: पूरण प्रकाश बंसल

पद: पत्रकार (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य

परिचय 

पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।

पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)

पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:

  • दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।

  • राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।

  • प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।

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