एनजीओ प्रतिनिधियों से संवाद एवं विभागीय निर्देश

बैठक में जिला कलेक्टर ने गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधियों से विस्तृत बातचीत की तथा श्रम, पुलिस, बाल अधिकारिता, शिक्षा और चिकित्सा विभागों को बाल श्रम उन्मूलन हेतु निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया की शत-प्रतिशत पालना के निर्देश दिए।


बाल श्रम के वैधानिक प्रावधान और अपवाद

अधिनियम के वैधानिक प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए निर्देशित किया गया है कि:

  • 14 वर्ष से कम आयु के बालक को किसी पेशे या उपजीविका हेतु नियोजित नहीं किया जा सकता।
  • 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोर को खतरनाक उद्योगों व प्रक्रियाओं में नियोजित नहीं किया जाएगा।
  • "विद्यालय समय के पश्चात् या अवकाश के दौरान गैर-खतरनाक पारिवारिक उद्यमों में सहायता करने वाले बालकों तथा विद्यालयी शिक्षा को प्रभावित किए बिना सर्कस को छोड़कर अन्य मनोरंजन गतिविधियों (जैसे फिल्म, विज्ञापन आदि) में भाग लेने वाले बाल कलाकारों को इससे अपवाद स्वरूप मुक्त रखा गया है।"

श्रम कल्याण अधिकारी अशोक कुमार मीना ने स्पष्ट किया है कि 14 वर्ष से कम आयु के बालकों का ढाबा, प्लास्टिक यूनिट, बीड़ी निर्माण जैसे उद्यमों में नियोजन पूर्णतः निषिद्ध है।


किशोरों (14 से 18 वर्ष) के नियोजन हेतु सख्त नियम

किशोरों के संदर्भ में यह सख्त हिदायत दी गई है कि उन्हें खान, खनन कार्य, ईंट भट्टा, पटाखा निर्माण, रसायन और सीमेंट जैसे किसी भी खतरनाक उद्योग व प्रक्रिया में नियोजित नहीं किया जा सकता। कार्य की शर्तें निम्नवत रहेंगी:

  • नियोजन केवल प्रातः 8:00 बजे से सायं 7:00 बजे के मध्य ही दिन के समय हो सकता है।
  • कार्य प्रतिदिन अधिकतम 6 घंटे तक सीमित रहेगा।
  • तीन घंटे के निरंतर कार्य के पश्चात् एक घंटे का विश्राम अनिवार्य है।
  • किसी भी परिस्थिति में उनसे ओवरटाइम कार्य करवाना पूर्णतः प्रतिबंधित है।

अंतर्विभागीय समन्वय एवं पुनर्वास प्रक्रिया

बैठक में बाल अधिकारों के संरक्षण हेतु अंतर्विभागीय समन्वय पर विशेष जोर दिया गया। शिक्षा विभाग को निर्देशित किया गया है कि विद्यालय प्रधान को बिना सूचित किए लगातार 30 दिवस से अधिक अनुपस्थित रहने वाले बालक-बालिकाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा इसकी सूचना अनिवार्य रूप से श्रम विभाग को प्रेषित की जाए।

मुक्त कराए गए बाल श्रमिकों हेतु प्रक्रिया:

  • श्रम विभाग द्वारा बयान दर्ज कर उन्हें न्यूनतम वेतन दिलाया जाएगा।
  • बाल अधिकारिता विभाग की बाल कल्याण समिति द्वारा उनका समुचित पुनर्वास किया जाएगा।
  • चिकित्सा विभाग द्वारा उनका आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।

दंडात्मक कार्यवाही और सजा के प्रावधान

जिला कलेक्टर ने कहा कि बाल व कुमार श्रम एक संज्ञेय अपराध है और नियमों की अनदेखी करने वाले नियोजकों पर सख्त दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।

उल्लंघन की स्थिति में दंड का विवरण इस प्रकार है:

उल्लंघन नियोजक हेतु दंड माता-पिता/संरक्षक हेतु दंड
प्रथम बार न्यूनतम 6 माह से 2 वर्ष तक कारावास तथा 20,000 से 50,000 रुपये तक जुर्माना सजा का प्रावधान नहीं
दूसरी बार 1 से 3 वर्ष तक जेल 10,000 रुपये का जुर्माना

"राज्य सरकार बाल अधिकारों के पूर्ण संरक्षण हेतु कटिबद्ध है और किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story