डीग: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 'पक्षी-घर' का किया लोकार्पण, नववर्ष पर दिया जीव-दया और सेवा का संदेश
डीग जिले के पूंछरी स्थित श्रीनाथ जी मंदिर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नववर्ष 2026 के अवसर पर सपरिवार पूजा-अर्चना की और नवनिर्मित 'पक्षी-घर' का लोकार्पण किया। स्वामी चंद्र प्रकाश मुखिया महाराज की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में गृह मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म भी मौजूद रहे। भामाशाहों के सहयोग से बने इस पक्षी-घर के जरिए सीएम ने जीव-दया और प्रकृति संरक्षण का बड़ा संदेश दिया है।

डीग, 01 जनवरी। अंग्रेजी नववर्ष 2026 और विक्रम संवत के पावन शुभारंभ पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भक्ति और सेवा का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को डीग जिले के ऐतिहासिक एवं सुप्रसिद्ध पूंछरी स्थित श्रीनाथ जी मंदिर में सपरिवार मत्था टेककर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर परिसर में नवनिर्मित आधुनिक 'पक्षी-घर' का विधिवत लोकार्पण कर मूक पक्षियों के संरक्षण और प्रकृति प्रेम का एक सशक्त संदेश जन-जन तक पहुँचाया।
नववर्ष के पहले दिन मुख्यमंत्री की इस यात्रा ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व की एक नई मिसाल पेश की है। श्रीनाथ जी के चरणों में विशेष पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री ने आधुनिक सुविधाओं से युक्त नवनिर्मित पक्षी-घर का उद्घाटन किया। यह पक्षी-घर न केवल पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय बनेगा, बल्कि उनके दाने-पानी की समुचित व्यवस्था का केंद्र भी होगा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि ईश्वर की आराधना तभी पूर्ण होती है जब हम प्रकृति और उसके मूक प्राणियों के प्रति दयाभाव रखें। उन्होंने इस पहल को 'परम धर्म' बताते हुए नागरिकों से जीव-दया के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
यह गरिमामयी समारोह स्वामी चंद्र प्रकाश मुखिया महाराज की पावन अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में गृह, गौपालन, पशुपालन, डेयरी तथा मत्स्य विभाग राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री ने इस पुनीत कार्य में सहयोग देने वाले स्थानीय भामाशाहों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। इस पक्षी-घर का निर्माण जन-सहयोग और पूर्वजों की स्मृति में किया गया है, जिसमें स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय रघुनाथ प्रसाद, स्वर्गीय श्रीमती प्रेमवती, स्वर्गीय श्रीमती भगवती देवी एवं स्वर्गीय श्री बालस्वरूप अटोलिया की पावन स्मृति में उनके परिजनों ने महत्वपूर्ण आर्थिक योगदान दिया है।
समारोह के दौरान पूरा मंदिर परिसर 'जय श्रीनाथ जी' के जयकारों से गुंजायमान रहा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। स्थानीय श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री की इस पहल और भामाशाहों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि जन-सहयोग से निर्मित यह प्रकल्प समाज में सेवा और परोपकार की नई ऊर्जा का संचार करेगा। मुख्यमंत्री का यह दौरा न केवल एक राजनीतिक यात्रा थी, बल्कि इसने राजस्थान की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जीव-जंतुओं के संरक्षण से जोड़कर एक प्रेरणादायक अध्याय लिख दिया है।

Pratahkal Bureau
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