डीग में परंपरा और पौरुष का महाकुंभ: गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने 64वीं अखिल भारतीय शूटिंग वॉलीबॉल प्रतियोगिता का किया भव्य शंखनाद
डीग के ग्राम बेढ़म में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने 64वीं अखिल भारतीय शूटिंग वॉलीबॉल प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ किया। महाराजा सूरजमल और वीर गोकुला जाट की स्मृति में आयोजित इस ऐतिहासिक खेल उत्सव में मंत्री ने युवाओं को पुरखों की विरासत सहेजने और मैदान में अनुशासन सीखने का मंत्र दिया। बुजुर्गों के आशीर्वाद और खेल के जोश के साथ नववर्ष पर डीग की धरा पर संस्कृति और पौरुष का अनूठा संगम देखने को मिला।

डीग, 01 जनवरी। राजस्थान की वीर प्रसूता माटी, जो सदियों से शूरवीरों और पहलवानों के पराक्रम की साक्षी रही है, आज नववर्ष के प्रथम सूर्य की किरणों के साथ एक बार फिर खेल और संस्कृति के अनूठे संगम से सराबोर हो उठी। ब्रजनगर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बेढ़म में छह दशकों से चली आ रही गौरवशाली विरासत को जीवंत करते हुए 64वीं अखिल भारतीय शूटिंग वॉलीबॉल प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ हुआ। वीर गोकुला जाट और अजेय लौह पुरुष महाराजा सूरजमल के बलिदान दिवस की पावन स्मृति में आयोजित इस खेल कुंभ की कमान स्वयं राजस्थान सरकार के गृह, गौपालन, पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य विभाग राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने संभाली।
इतिहास और आधुनिकता के इस मिलन बिंदु पर गृह राज्य मंत्री ने विधिवत रिबन काटकर और वॉलीबॉल कोर्ट पर पहली 'सर्विस' कर प्रतियोगिता का आगाज किया। मैदान में मौजूद जनसमूह के उत्साहवर्धन और खिलाड़ियों के जोश ने समूचे वातावरण को ऊर्जा से भर दिया। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने गौरवशाली अतीत का स्मरण कराते हुए कहा कि महाराजा सूरजमल और वीर गोकुला जाट का जीवन प्रत्येक भारतवासी के लिए स्वाभिमान और अनवरत संघर्ष की अमर गाथा है। उन्होंने आधुनिक युवाओं का आह्वान किया कि वे आभासी दुनिया (सोशल मीडिया) के मायाजाल से बाहर निकलकर खेल के मैदानों में पसीना बहाएं, क्योंकि खेल के मैदान से उपजा अनुशासन ही एक सशक्त और विकसित भारत के निर्माण का आधार बनता है।
यह प्रतियोगिता मात्र एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि बेढ़म ग्राम के सामूहिक सौहार्द और सांस्कृतिक अखंडता का प्रतीक है। पिछले 64 वर्षों से निरंतर संचालित इस गौरवमयी परंपरा की सराहना करते हुए मंत्री ने कहा कि अपनी जड़ों और पुरखों की विरासत को सहेजना ही युवा पीढ़ी का परम धर्म है। उद्घाटन समारोह के दौरान उस समय एक बेहद भावुक और आत्मीय दृश्य देखने को मिला जब गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने पद की गरिमा और प्रोटोकॉल की सीमाओं को परे रख, एक ग्रामीण पुत्र की भांति गांव के बुजुर्गों के बीच पहुंचकर उनके चरण स्पर्श किए। बुजुर्गों ने भी अपने लाड़ले जनसेवक को गले लगाकर हृदय से आशीर्वाद दिया, जिसे मंत्री ने अपनी असली शक्ति बताया।
कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती और अजेय योद्धा महाराजा सूरजमल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया, जहां प्रदेश की समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई। इस ऐतिहासिक अवसर पर पूरन प्रकाश बंसल, स्थानीय जनप्रतिनिधि, पुलिस एवं प्रशासन के आला अधिकारी सहित हजारों की संख्या में खेल प्रेमी उपस्थित रहे। दर्शकों की करतल ध्वनि और खिलाड़ियों के संकल्प ने यह स्पष्ट कर दिया कि डीग-भरतपुर की यह धरा आज भी अपने शौर्य और खेल भावना को अक्षुण्ण रखने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
