डीग, 17 फरवरी: प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय उपसेवाकेंद्र डीग की ओर से महाशिवरात्रि के पावन पर्व को बड़े धूम-धाम के साथ मनाया गया।


मंच पर उपस्थित मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट जन

  • मुख्य अतिथि: भ्राता संत दास बाबा राजा, मुरली मनोहर मंदिर डीग
  • अध्यक्षता: ब्र. कु. बबिता दीदी (सह प्रभारी, भरतपुर)
  • विशिष्ट अतिथि: भ्राता भगवान शरण आड़तिया एवं महामंत्री हिंदी साहित्य समिति डीग
  • विशिष्ट अतिथि: भ्राता चंद्रभान वर्मा, अध्यक्ष श्री लोहागढ़ साहित्य एवं समाज सेवा समिति डीग
  • गरिमामयी उपस्थिति: वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्र. कु. प्रवीणा बहिन (प्रभारी डीग), ब्र. कु. योगिता बहिन, प्रभारी ओल ब्र. कु. जागृति बहिन

कार्यक्रम का शुभारंभ एवं प्रभात फेरी

कार्यक्रम की शुरुआत ईश्वरीय स्मृति के गीत के साथ हुई: "ऐ आत्माओं को सुन लो शिव ये शुभ संदेश"। कार्यक्रम से पूर्व डीग कस्बे के मुख्य स्थानों पर परमात्मा शिव के उद्घोष करते हुए प्रभात फेरी निकाली गई। प्रभात फेरी में शिव शंकर एवं राधा कृष्ण की झाँकि के सभी को दर्शन कराए गए। प्रभात फेरी को संत दास बाबा राजा मनोहरी मंदिर के द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।


मुख्य अतिथि का संबोधन

मुख्य अतिथि भ्राता संत दास बाबा राजा ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा:

"परमात्मा शिव एकांत वासी कहलाते है। ईश्वर की प्राप्ति अगर हम करना चाहते है तो एकांत और मौन की आवश्यकता होती है। समय स्वप्न के सामान है हमें इसे व्यर्थ नहीं गवाना चाहिए, ईश्वर का ध्यान करना चाहिए। रामचरित मानस का पाठ अनेक करते है पर आचरण में कभी नहीं लाता है। ईर्ष्या, निंदा, चुगली किसी की भी नहीं करनी चाहिए। मैं ऐसे महा पर्व की हार्दिक शुभकामनायें देता हूँ।"

अध्यक्षीय उद्बोधन एवं आध्यात्मिक रहस्य

ब्र. कु. बबिता दीदी ने शिवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए कहा:

"शिव रात्रि परमात्मा का अवतरण दिवस है जिसे हम सभी बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन नमक, मिर्च नहीं खाते अर्थात हमें नमक जैसे कड़वे और मिर्च जैसे तीखे बोल नहीं बोलना चाहिए एवं सभी से प्यार से व्यवहार करना चाहिए। समाज में आपसी प्यार, सहयोग, सम्मान देकर चलना ही सच्चा जीवन है।"

विशिष्ट अतिथियों के विचार एवं कविता पाठ

विशिष्ट अतिथि भ्राता भगवान शरण आड़तिया और भ्राता चंद्रभान वर्मा ने भी अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त कीं। इस दौरान चंद्रभान वर्मा ने एक प्रेरक कविता सुनाई: "घर घर शिव का ध्वज फहराएंगे"। वहीं ब्र. कु. योगिता बहिन ने परमात्मा का सत्य परिचय देते हुए कहा कि "परमात्मा निराकार ज्योति बिंदु स्वरूप है और गुणों के सिंधु है।"


ध्वजारोहण एवं सामूहिक प्रतिज्ञा

कार्यक्रम में सभी अतिथियों के द्वारा शिव ध्वजा रोहण किया गया एवं सभी को प्रतिज्ञाएँ करवाई गईं कि हम मन, वचन और कर्म से किसी को भी दुख नहीं देंगे।


उपस्थित गणमान्य नागरिक

इस अवसर पर शहर के सैकड़ों भाई-बहन और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:

  • भ्राता दीपू फौजदार (पूर्व प्रेसिडेंट डीग कॉलेज)
  • रज्जन सिंह (अध्यापक)
  • गिरधारी, दिगंबर, गौरव, सुरेश
  • गीता, केला, मुस्कान, मोनिका

समाज में आपसी प्यार, सहयोग, सम्मान देकर चलना ही सच्चा जीवन है और इसी लक्ष्य के साथ यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।

Pooran Prakash Bansal, Deeg

Pooran Prakash Bansal, Deeg

नाम: पूरण प्रकाश बंसल

पद: पत्रकार (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य

परिचय 

पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।

पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)

पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:

  • दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।

  • राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।

  • प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।

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