डीग: भागवत कथा में वराह अवतार, जड़भरत और राजा प्रियव्रत प्रसंग का वर्णन
खेरिया पुरोहित गांव में आयोजित भागवत कथा के तीसरे दिन व्यास बाबू जी ने भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों और भक्तों के चरित्र की महिमा का विस्तार से वर्णन किया।

डीग के गांव खेरिया पुरोहित में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर व्यास पीठ से वराह अवतार की कथा सुनाते कथावाचक श्री राधे राधे बाबू जी।
भगवान विष्णु का वराह अवतार
यह कथा हिरण्याक्ष राक्षस द्वारा पृथ्वी को समुद्र (पाताल लोक) में छिपाने पर आधारित है। कथावाचक श्री राधे राधे बाबू जी ने सुनाया कि:
"भगवान विष्णु ने एक विशाल सूअर (वराह) का रूप धारण किया, राक्षस हिरण्याक्ष का वध किया और अपनी दढ़ों (दांतों) पर पृथ्वी को बाहर निकालकर स्थापित किया, जो धर्म की पुनर्स्थापना का प्रतीक है।"
जड़भरत चरित्र की महिमा
- जड़भरत का प्रकृत नाम 'भरत' है, जो पूर्वजन्म में स्वायंभुव वंशी ऋषभदेव के पुत्र थे।
- मृग के छौने में तन्मय हो जाने के कारण इनका ज्ञान अवरुद्ध हो गया था और वे जड़वत् हो गए थे जिससे ये जड़भरत कहलाए।
- जड़भरत की कथा विष्णुपुराण के द्वितीय भाग में और भागवत पुराण के पंचम काण्ड में आती है।
राजा प्रियव्रत का उपाख्यान
प्रियव्रत का उपाख्यान श्रीमद्भागवत पुराण (पंचम स्कंध) में वर्णित है। राजा प्रियव्रत स्वयंभुव मनु के पुत्र और भगवान विष्णु के परम भक्त थे। नारद मुनि के उपदेश से पहले वे संसार से विरक्त थे, लेकिन बाद में ब्रह्माजी के आदेश पर उन्होंने संसार के कल्याण के लिए विवाह किया, गंधमादन पर्वत पर तपस्या की और धर्मपरायण राजा बने।
भक्तों की भारी उपस्थिति और स्वागत
श्रीमदभागवत का रसपान करने पहुंचे आस पास के सभी गाँवो से व गांव के सभी बुजुर्ग, युवा साथ माता बहने बड़ी संख्या मे मौजूद रहे।
समस्त ग्रामवासियों ने व्यास पीठ का स्वागत कर महाराज जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।

Pratahkal Bureau
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