डीग में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर जिला कलेक्टर सख्त, कचरा निस्तारण और चौराहों पर जाम रोकने के निर्देश
जिला कलेक्टर मयंक मनीष ने ग्रेप-1 के तहत धूल नियंत्रण, पुराने वाहनों पर कार्रवाई और शहर के प्रमुख चौराहों पर जाम से निपटने के निर्देश दिए।

डीग कलेक्ट्रेट में शुक्रवार को जिला कलेक्टर मयंक मनीष की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक, जिसमें वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
डीग में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए जिला कलेक्टर मयंक मनीष ने अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) की पालना, कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई और प्रमुख चौराहों पर जाम की समस्या के समाधान की समीक्षा की गई।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू ग्रेप की प्रभावी पालना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित बैठक में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्देशों और संशोधित ग्रेप कार्यक्रम के तहत किए जाने वाले उपायों पर चर्चा हुई। प्रदूषण नियंत्रण मंडल, भरतपुर के क्षेत्रीय अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि एनसीआर सहित डीग जिले में 21 अक्टूबर से ग्रेप का प्रथम चरण लागू है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 200 से 300 होने पर ग्रेप-1, 300 से 400 पर ग्रेप-2, 400 से 450 पर ग्रेप-3 तथा 450 से अधिक होने पर ग्रेप-4 लागू होता है।
जिला कलेक्टर मयंक मनीष ने निर्माण एवं ध्वस्तीकरण गतिविधियों के दौरान धूल उड़ने से रोकने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कचरे को निर्धारित स्थलों पर ही डालने और नगर परिषद को उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही, नियमों की पालना नहीं करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के उपाय प्रभावी ढंग से लागू किए जा सकें।
प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नियंत्रण के लिए जिला कलेक्टर ने पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने जिन वाहनों के पास प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं है, उनकी सूची तैयार कर परिवहन विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। बिजली कटौती कम रखने के लिए जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेवीवीएनएल) को निर्देशित किया गया। इसके अलावा, कोयला एवं लकड़ी के स्थान पर गैस और बिजली जैसे स्वच्छ ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।
शहर की यातायात व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के लिए जिला कलेक्टर ने लक्ष्मण मंदिर क्षेत्र और कोशी चौराहा सहित प्रमुख चौराहों पर जाम की समस्या के समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने यातायात पुलिस एवं नगर परिषद को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा, ताकि यातायात का संचालन सुचारू रखा जा सके।
बैठक में अधीक्षण अभियंता जेवीवीएनएल बनवारी लाल वर्मा, नगर परिषद आयुक्त कुलदीप सिंह, जिला परिवहन अधिकारी राधेश्याम शर्मा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में दिए गए निर्देशों के तहत कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण, स्वच्छ ईंधन के उपयोग और प्रमुख चौराहों पर यातायात सुधारने के उपायों पर विशेष जोर दिया गया।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
