डीग: मां शारदे के आशीष से गूंजा आदर्श विद्या मंदिर, नन्हे कदमों ने विद्यारम्भ संस्कार के साथ रखा ज्ञान की दहलीज पर कदम
डीग के बालिका उच्च प्राथमिक आदर्श विद्या मंदिर में बसंत पंचमी के पावन पर्व पर 'विद्यारम्भ संस्कार' का भव्य आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. धर्मेंद्र शास्त्री की उपस्थिति में नन्हे बच्चों ने यज्ञ में आहुति देकर और शैक्षिक किट प्राप्त कर अपनी ज्ञान यात्रा का शुभारंभ किया। जानिए कैसे संस्कारों के साथ शुरू हुई इन मेधावियों की नई पारी।

डीग। कला, ज्ञान और विवेक की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के पावन पर्व बसंत पंचमी के सुअवसर पर डीग स्थित बालिका उच्च प्राथमिक आदर्श विद्या मंदिर में एक आध्यात्मिक और ऊर्जावान वातावरण देखने को मिला। विद्या भारती द्वारा संचालित इस संस्थान में शुक्रवार को 'विद्यारम्भ संस्कार' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया, जहां मंत्रोच्चार और हवन की आहुतियों के बीच नन्हे मुन्नों ने अपने शैक्षिक जीवन की पहली सीढ़ी चढ़ी। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. धर्मेंद्र शास्त्री के सान्निध्य में मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसने संपूर्ण परिसर को सकारात्मकता से सराबोर कर दिया।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. धर्मेंद्र शास्त्री ने बसंत पंचमी के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि यह दिन केवल एक तिथि मात्र नहीं, बल्कि साक्षात ज्ञान की देवी के अवतरण का उत्सव है। यह दिवस नई शुरुआत, रचनात्मकता और प्रकृति में संचारित होने वाली नई ऊर्जा व ताजगी का प्रतीक है, जो विद्यार्थियों के जीवन में बौद्धिक प्रकाश भरने का कार्य करता है। विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेश कुमार ने इस संस्कार की महत्ता बताते हुए साझा किया कि विद्यारम्भ संस्कार का मूल उद्देश्य बालकों के अंतर्मन में प्रारंभ से ही श्रेष्ठ संस्कारों का बीजारोपण करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन संस्कारों के माध्यम से ही बालक भविष्य में मेधावी, विवेकशील और चरित्रवान नागरिक बनकर उभर सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान परंपराओं का निर्वहन करते हुए देवेंद्र बंसल ने मुख्य अतिथि को दुपट्टा पहनाकर उनका आत्मीय अभिनंदन किया। आयोजन का मुख्य आकर्षण वहां आयोजित भव्य यज्ञ रहा, जिसमें नव-प्रवेशित नन्हे बालकों ने पूर्ण श्रद्धा के साथ आहुतियां अर्पित कीं। अपनी नई पारी की शुरुआत कर रहे इन बच्चों के चेहरों पर उत्साह देखते ही बनता था, जब उन्हें विद्यालय की ओर से उपहार स्वरूप एक-एक शैक्षिक बैग भेंट किया गया। इस किट में स्लेट, पेंसिल, टिफिन, पानी की बोतल, पुस्तक और एक संपूर्ण शैक्षिक किट शामिल थी, जो उनकी शिक्षण यात्रा को सुलभ बनाएगी।
इस गरिमामय अवसर पर विद्यालय परिवार और समाज के गणमान्य जन साक्षी बने। कार्यक्रम में विद्यालय के संरक्षक कश्मीर लाल अरोड़ा सहित कपूर चंद, प्रियंका शर्मा, सरिता गोयल और रुचि शर्मा ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनके साथ ही बालकृष्ण शर्मा, बाल स्वरूप शर्मा, अशोक शर्मा, आशा शर्मा, आदेश शर्मा, बबीता, दीप्ति, कीर्ति, श्रीदत्त शर्मा और नताशा ने भी अपनी सहभागिता निभाते हुए बच्चों को आशीर्वाद प्रदान किया। यह आयोजन न केवल शिक्षा की शुरुआत का प्रतीक रहा, बल्कि इसने समाज को यह संदेश भी दिया कि ज्ञान के साथ संस्कारों का मेल ही सर्वांगीण विकास की असली कुंजी है।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
