डीग। नव वर्ष के प्रथम सूर्योदय के साथ ही जलमहलों की नगरी डीग श्रद्धा और भक्ति के अटूट रंग में सराबोर हो उठी। गुरुवार को शहर में उस समय आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया, जब मां धोलागढ़ देवी की 37वीं और कैला देवी झील का बाड़ा की 39वीं विशाल पदयात्रा गाजे-बाजे के साथ गंतव्य के लिए प्रस्थान हुई। भक्ति के इस उल्लास में पूरा शहर शामिल हुआ, जहां फिजाओं में केवल मां के जयकारे और ढोल-नगाड़ों की थाप सुनाई दे रही थी।

इस धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ नई सड़क स्थित कैला देवी पथवारी मंदिर पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ हुआ। जैसे ही मां की सवारी मुख्य मार्ग पर पहुंची, श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। फूलों से सजी मां की दिव्य सवारी और ऊंट-घोड़ों के लवाजमे ने दृश्य को भव्य बना दिया। शहरवासियों ने पलक-पांवड़े बिछाकर जगह-जगह आरती उतारी और पुष्प वर्षा कर पदयात्रियों का आत्मीय स्वागत किया। इसी कड़ी में कामा गेट स्थित धोलागढ़ मंदिर से मां धोलागढ़ देवी की भव्य सवारी निकाली गई, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय कर दिया।

यात्रा के दौरान भक्ति का उत्साह चरम पर था। बैंड-बाजों की मधुर धुनों और भजनों पर नाचते-गाते श्रद्धालु मां की भक्ति में लीन नजर आए। इस पावन अवसर पर मुख्य रूप से बाल किशन गोयल मुझेरे, राजू काका, गणेश बतासे वाले, संजय जैन, दीपक गोयल, ललित अग्रवाल, अमित जैन सहित सैकड़ों की संख्या में महिला एवं पुरुष पदयात्री शामिल हुए। श्रद्धालुओं का यह कारवां आपसी सौहार्द और अटूट विश्वास का प्रतीक बना रहा।

आयोजन समिति के अनुसार, ये दोनों पदयात्राएं 3 जनवरी को मां के दरबार में पहुंचेंगी। यात्रा के समापन पर 4 जनवरी को माता के चरणों में हाजिरी लगाकर विधि-विधान से हवन-पूजन किया जाएगा और विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें हजारों भक्त प्रसादी ग्रहण करेंगे। नव वर्ष पर निकली इस पदयात्रा ने न केवल धार्मिक महत्ता को दर्शाया, बल्कि शहर की सांस्कृतिक एकता और श्रद्धा को भी एक नई ऊंचाई प्रदान की है।

Pratahkal Bureau

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