डीग जिले में 8वीं बोर्ड परीक्षा शुरू, 29 केंद्रों पर 4287 परीक्षार्थी शामिल
मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी अनीता बाई राघव की निगरानी में शुरू हुई परीक्षा, मूक बधिर छात्रों को मिला 50 मिनट का अतिरिक्त समय।

परीक्षार्थियों का विवरण
- कुल परीक्षार्थी: 4287
- छात्र: 2231
- छात्राएं: 2056
अधिकारियों के निर्देश और निगरानी
मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी डीग अनीता बाई राघव ने जानकारी देते हुए बताया कि -
"आठवीं बोर्ड परीक्षा में 2231 छात्र और 2056 छात्राओं सहित कुल 4287 परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं परीक्षा के सफल और शांतिपूर्ण संपन्न करने के लिए उड़नदस्ता गठित कर परीक्षाओं पर निगरानी रखी जाएगी।"
परीक्षा समय सारणी और विशेष प्रावधान
उन्होंने बताया कि परीक्षा का समय दोपहर 1.30 बजे से शाम 4 बजे तक रखी गई है।
मूक बधिर बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है:
- मूक बधिर बच्चों के लिए परीक्षा समय में शिथिलता देते हुए 50 मिनट का अतिरिक्त समय दिया गया है जहां परीक्षा के निर्धारित समय शाम 4:50 तक वह परीक्षा दे सकेंगे।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
