अन्नदाताओं के सम्मान, समृद्धि और सुरक्षा की दिशा में राजस्थान सरकार के निर्णायक कदम
राजस्थान सरकार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में किसानों के सम्मान, समृद्धि और सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पीएम किसान सम्मान निधि, ब्याजमुक्त ऋण, फसल बीमा, समर्थन मूल्य पर खरीद, सिंचाई, बिजली, पशुपालन और कृषि आधुनिकीकरण योजनाओं से प्रदेश के लाखों किसानों को बड़ा लाभ मिला है।

डीग, 15 दिसंबर।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसान कल्याण के संकल्प को सशक्त धरातल पर उतारते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार प्रदेश के अन्नदाताओं के सम्मान, समृद्धि और सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य सरकार की नीतियों और योजनाओं का केंद्र बिंदु किसान का आर्थिक सशक्तिकरण, कृषि क्षेत्र की मजबूती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण रहा है। वित्तीय सहायता से लेकर फसल सुरक्षा, सिंचाई, बिजली, पशुपालन और कृषि आधुनिकीकरण तक, सरकार ने किसानों के हर पहलू को ध्यान में रखते हुए व्यापक और दूरदर्शी पहल की है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं।
प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में राजस्थान ने देशभर में उल्लेखनीय स्थान बनाया है। किसानों की संख्या के आधार पर राज्य इस योजना में देश में पाँचवें स्थान पर है। अब तक प्रदेश के 76.18 लाख किसानों को 10,432 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है। किसानों को अतिरिक्त आर्थिक संबल देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने अपनी ओर से वार्षिक सहायता राशि को 6,000 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये किया है, जिससे किसानों की नियमित आय में स्थायित्व आया है।
किसानों की आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया है। अब तक 44,067 करोड़ रुपये का ब्याजमुक्त अल्पकालीन फसली ऋण वितरित किया गया है, जिससे किसानों को बुवाई और कृषि कार्यों के लिए समय पर पूंजी मिल सकी। इसके साथ ही 356 करोड़ रुपये का दीर्घकालीन सहकारी ऋण रियायती ब्याज दर पर दिया गया है। किसानों को बिजली बिलों से राहत प्रदान करते हुए 44,558 करोड़ रुपये का अनुदान भी दिया गया है। प्राकृतिक आपदाओं और फसल नुकसान से सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अब तक 6,207 करोड़ रुपये के बीमा क्लेम का भुगतान किया जा चुका है, जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक सहारा मिला है।
किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की व्यापक खरीद की गई है। राज्य सरकार ने 2.66 लाख किसानों से 33.42 लाख मीट्रिक टन गेहूँ की खरीद की, जिसके साथ 471.16 करोड़ रुपये का बोनस भी प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त दालों और तिलहनों की 12.60 लाख मीट्रिक टन खरीद कर लगभग 5 लाख किसानों को 8,191 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है, जिससे किसानों की आय में सीधा लाभ हुआ है।
कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सिंचाई और बिजली सुविधाओं का विस्तार भी सरकार की प्राथमिकताओं में रहा है। 10,418 करोड़ रुपये की लागत से 84,592 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित की गई है। किसानों को समय पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए 1.86 लाख नए कृषि विद्युत कनेक्शन जारी किए गए हैं, वहीं 22 जिलों में किसानों को दिन के समय दो ब्लॉक में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था लागू की गई है।
स्वच्छ ऊर्जा और किसानों की आय वृद्धि की दिशा में पीएम-कुसुम योजना के तहत राजस्थान ने राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी भूमिका निभाई है। पीएम-कुसुम बी के अंतर्गत 51,927 सोलर पंप स्थापित किए गए हैं, जिन पर 822 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है। इस प्रदर्शन के चलते राजस्थान ने कुसुम-ए में देश में प्रथम तथा कुसुम-सी में तृतीय स्थान प्राप्त किया है।
कृषि के साथ-साथ पशुपालन को भी आय का सशक्त माध्यम बनाने के लिए राज्य सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं। मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत 20.30 लाख पशुओं का बीमा किया गया है। दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के माध्यम से 5 लाख पशुपालकों को 1,172 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। वहीं गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 84,604 परिवारों को 634 करोड़ रुपये का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया गया है।
कृषि आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ा जा रहा है। सिंचाई के लिए जल संग्रहण हेतु 43,327 डिग्गी एवं फार्म पॉण्ड निर्माण पर 371 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है। इसके साथ ही 1.02 लाख कृषि यंत्रों की खरीद पर 230 करोड़ रुपये तथा ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के लिए 2.21 लाख किसानों को 1,018 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। खेतों की सुरक्षा और संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए तारबंदी, ग्रीन हाउस और शेडनेट हाउस पर भी सैकड़ों करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है।
राज्य सरकार की ये पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं, बल्कि कृषि क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और युवाओं की भागीदारी को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं। राजस्थान में किसान कल्याण की यह सतत यात्रा प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के साथ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती दे रही है।
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Pratahkal Bureau
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