भुसावर में मौनी अमावस्या पर आस्था का जनसैलाब: चतुर्ग्रही योग के बीच श्रद्धालुओं ने धारण किया मौन, शिवालयों में गूंजे शिव-शक्ति के जयकारे
भुसावर में मौनी अमावस्या पर उमड़ा आस्था का सैलाब। चतुर्ग्रही योग और शिववास योग के दुर्लभ संयोग में श्रद्धालुओं ने किया मौन व्रत और दान-पुण्य। पंडित पुष्पेन्द्र मिश्रा, राजेश शुक्ला और राघवेन्द्र शर्मा के मार्गदर्शन में हुए विशेष अनुष्ठान। कोठी वाले हनुमानजी और हूंकारेश्वर महादेव सहित सभी देवालयों में गूंजे भजन, महिलाओं ने दी नृत्य की प्रस्तुति। क्षेत्र की खुशहाली के लिए मांगी गई मन्नतें।

भुसावर। माघ मास की पवित्र कृष्ण पक्ष की अमावस्या यानी मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर आज भुसावर कस्बा सहित संपूर्ण उपखंड क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। सूर्योदय के साथ ही समूचा क्षेत्र भक्ति के रंग में रंगा दिखा, जहाँ सनातन धर्मावलंबियों ने आत्म-विश्वास की वृद्धि और नई ऊर्जा की कामना के साथ पवित्र अनुष्ठान किए। शिवालयों और देवालयों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिकता के दौर में भी परंपराओं और श्रद्धा का संगम अटूट है। दान-पुण्य, जप-तप और पितृ तर्पण के माध्यम से श्रद्धालुओं ने न केवल पुण्य अर्जित किया, बल्कि क्षेत्र की खुशहाली के लिए मन्नतें भी मांगीं।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इस वर्ष की मौनी अमावस्या विशेष ज्योतिषीय संयोगों के कारण अत्यंत फलदायी रही। विद्वान पंडित पुष्पेन्द्र मिश्रा, राजेश शुक्ला और राघवेन्द्र शर्मा ने इस विशेष अवसर की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस बार मकर लग्न में सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र की उपस्थिति ने 'चतुर्ग्रही योग' का निर्माण किया। इसके साथ ही पूर्वाषाढ़ और उत्तराषाढ़ नक्षत्र के दुर्लभ संयोग ने इस दिन के आध्यात्मिक महत्व को कई गुना बढ़ा दिया। पंडितों ने स्पष्ट किया कि 'मौनी' शब्द का मूल अर्थ मौन रहना है। मौन धारण करने से न केवल मानसिक विकारों का नाश होता है, बल्कि व्यक्ति के आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है और उसे नई सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। इसी शिववास योग में श्रद्धालुओं ने कालसर्प दोष निवारण के लिए विशेष पूजा-अर्चना की और शिव-शक्ति की कृपा प्राप्ति हेतु साधना की।
कस्बे के प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल था। हिंडौन सड़क मार्ग स्थित प्राचीन कोठी वाले हनुमानजी मंदिर, पंचमुखी हनुमान जी मंदिर, हूंकारेश्वर महादेव मंदिर, भगत राज वाले हनुमानजी मंदिर, बड वाले शिम्भू हनुमानजी मंदिर, बनखण्डी वाले हनुमानजी मंदिर, चतुर्भुजी मंदिर, अथाई वाले हनुमानजी मंदिर और लक्ष्मण जी मंदिर के प्रांगण श्रद्धालुओं से अटे पड़े थे। विशेष रूप से महिला श्रद्धालुओं ने ढोलक और झांझ-मजीरों की थाप पर भावविभोर होकर भजनों की प्रस्तुति दी। हरि संकीर्तन और नृत्य के माध्यम से महिलाओं ने भगवान के चरणों में अपनी हाजिरी लगाई, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
आस्था के इस महापर्व पर सेवा का संकल्प भी अद्भुत दिखा। श्रद्धालुओं ने भगवान को तिल के पकवान, आंवला और गुड़ अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। दान-पुण्य की परंपरा का निर्वहन करते हुए कस्बे में विभिन्न स्थानों पर जरूरतमंदों को जन उपयोगी सामग्री वितरित की गई और उन्हें आदरपूर्वक भोजन प्रसादी ग्रहण करवाई गई। जीव दया के भाव के साथ गौमाता को हरा चारा और गुड़ खिलाकर पुण्य लाभ कमाया गया। मौनी अमावस्या का यह पर्व भुसावर में केवल एक धार्मिक आयोजन न रहकर, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनकर उभरा, जिसने जन-जन को नई ऊर्जा और शांति का संदेश दिया।

Pratahkal Bureau
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