भरतपुर, 20 जनवरी। कभी जिन्हें 'कोरोना वॉरियर' कहकर फूल-मालाओं से लादा गया और जिनके समर्पण को पूरे देश ने सलाम किया, आज वही स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ कहे जाने वाले संविदा नर्सेज कर्मी अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। भरतपुर जिले में अपनी लंबित मांगों और नियमितीकरण की गुहार लेकर संविदा निविदा नर्सेज कर्मियों का एक बड़ा दल मंगलवार को भाजपा जिला अध्यक्ष शिवानी दायमा के द्वार पहुँचा। यहाँ नर्सेज कर्मियों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें वर्षों से हो रहे शोषण को समाप्त करने और सम्मानजनक भविष्य की मांग की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत में नर्सेज कर्मियों ने जिला अध्यक्ष शिवानी दायमा का साफा और माला पहनाकर स्वागत किया, जिसके बाद चर्चा का दौर शुरू हुआ। इस दौरान जिला अध्यक्ष विशाल शर्मा ने कर्मियों की दयनीय स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि चाहे जिला अस्पताल हो, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), जनता क्लिनिक हो या फिर जीवनदायिनी 108 सेवा, इन सभी की व्यवस्थाओं को सुचारू रखने में संविदा कर्मियों की अहम भूमिका है। मात्र 7000 से 8000 रुपये के अल्प मानदेय पर ये कर्मी पिछले 5-6 वर्षों से अपनी सेवाएँ दे रहे हैं, लेकिन आज यही कर्मवीर नियमित होने के लिए दर-दर की ठोकर खाने को विवश हैं।

ज्ञापन के माध्यम से नर्सेज कर्मियों ने कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं को रेखांकित करते हुए मांग की है कि नियम 1965 के अनुसार मेरिट बोनस के आधार पर नई विज्ञप्ति जारी की जाए, ताकि लंबे समय से कार्य कर रहे अनुभवी नर्सेज को स्थायी रोजगार मिल सके। बेरोजगार नर्सेज कर्मियों का कहना है कि वे अस्पताल की व्यवस्था को संभालने में रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं, फिर भी उनके साथ 'अत्याचार' जैसा व्यवहार हो रहा है। उन्होंने भाजपा जिला अध्यक्ष के माध्यम से मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि सरकार उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर उन्हें इस अल्प वेतन के चक्रव्यूह से मुक्ति दिलाए।

इस अवसर पर अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से उठाने के लिए रामप्रकाश, दिगम्बर सिंह, पंकज, भूपेंद्र, राहुल चाहर, राहुल, रविन्द्र, ललित, हेमंत, धर्मेंद्र, टिंकल, उपेन्द्र सोनी, दिनेश गुर्जर और निशांत सहित भारी संख्या में संविदा नर्सेज बेरोजगार कार्मिक उपस्थित रहे। यह प्रदर्शन केवल एक ज्ञापन सौंपना मात्र नहीं था, बल्कि उन हजारों युवाओं की आवाज थी जो अल्प मानदेय के बोझ तले दबकर भी प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को ज़िंदा रखे हुए हैं। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार इन 'स्वास्थ्य प्रहरियों' की पुकार पर क्या ठोस कदम उठाती है।

Pratahkal Bureau

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