बाणगंगा पुल पर टूटी रेलिंग से बढ़ी सड़क दुर्घटनाओं की आशंका, प्रशासन सुस्त
भुसावर के हिंगोटा गांव स्थित बाणगंगा पुल पर लगी रेलिंग टूट गई है, जिससे वाहन चालकों की सुरक्षा खतरे में है। 1980 से अब तक 250 से अधिक हादसे हुए, 51 लोगों की जान गई। स्थानीय नागरिक और प्रशासनिक अधिकारी मामले की गंभीरता को लेकर सतर्क हैं और जल्द सुधार की अपील कर रहे हैं।

भुसावर। भुसावर के हिंगोटा गांव के पास स्थित बाणगंगा नदी के पुल पर लगे रेलिंग की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जुलाई 2021 में 16 लाख रुपए की लागत से यह रेलिंग स्थापित की गई थी, लेकिन पांच वर्ष भी पूरे होने से पहले ही यह टूट चुकी है। इस पुल पर रेलिंग टूटने से वाहन चालकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है और सड़क हादसों की संभावना लगातार बनी हुई है।
इतिहास गवाह है कि यह पुल दुर्घटनाओं का अड्डा रहा है। 2015 में इसी पुल से एक वैन सूखी नदी के पेटे में गिर गई, जिसमें नगर निवासी एक महिला की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। 2019 में एक बाइक सवार भी इसी नदी में गिर कर मारा गया। इन घटनाओं के बाद सरकार ने 2021 में पुल पर रेलिंग लगाने के लिए 16 लाख रुपए स्वीकृत किए और आरएसआरडीसी के माध्यम से ठेकेदार ने इसे लगाया।
लेकिन पांच वर्ष भी पूरे न होने से पहले रेलिंग टूट चुकी है और कई महीने गुजर जाने के बाद भी इसे ठीक नहीं कराया गया। स्थानीय नागरिक मालाहेड़ा निवासी हमवीर सिंह जाट, शिवराम, राकेश सिंह और कौशल फौजदार ने बताया कि इस पुल पर 1980 से अब तक 250 से अधिक दुर्घटनाएं हुई हैं, जिसमें 51 लोगों की मौत हुई और 250 से अधिक लोग घायल हुए।
सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, स्टेट मेगा हाईवे-45 पर आरएसआरडीसी द्वारा कुछ ब्रेकर लगाए गए हैं, जिससे दुर्घटनाओं में कुछ कमी आई है। लेकिन हिंगोटा मोड़, खेरली मोड़, पाथेना बिजली घर, शाहियद मजार और पाथेना पुलिया जैसे दुर्घटना स्थल अब भी खतरनाक बने हुए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क से नदी का पेटा लगभग 15 फीट ऊँचा है और अगर कोई वाहन गिरता है तो गंभीर हादसा होने की संभावना रहती है।
आरएसआरडीसी के सहायक अभियंता संजय कश्यप ने बताया कि टूटी रेलिंग की समस्या उच्च अधिकारियों को अवगत कराई जाएगी और खुद मौके पर जाकर जांच की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क में मौजूद खड्डों को भी भरवाया जाएगा।
पुल पर टूटी रेलिंग और सुरक्षा की उपेक्षा न केवल स्थानीय नागरिकों के लिए खतरे का संकेत है, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र की गंभीर जवाबदेही को भी उजागर करती है। जल्द कार्रवाई की आवश्यकता बनी हुई है ताकि सड़क हादसों को रोका जा सके।

Pratahkal Bureau
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