भुसावर के बौराज गांव में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन गोवर्धन पूजा का आयोजन
पंडित मुकुट बिहारी शास्त्री ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और माखन चोरी के आध्यात्मिक अर्थ समझाए, आकर्षक झांकियां सजाई गईं।

भुसावर के बौराज गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण और नरसिंह अवतार की झांकी के साथ पंडित मुकुट बिहारी शास्त्री।
भुसावर उपखण्ड के गांव बौराज में दूर्वाक चेरिटेवल ट्रस्ट के बैनर तले विकास समिति की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा वाचक पंडित मुकुट बिहारी शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माखन लीला और गोवर्धन पूजा के प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। इस अवसर पर आकर्षक झांकियों का भी आयोजन किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
कथा के दौरान संगीतमय प्रवचन करते हुए पंडित मुकुट बिहारी शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि लीला और क्रिया में अंतर होता है। अभिमान और सुखी रहने की इच्छा को प्रक्रिया कहा जाता है, जबकि इसमें न तो कर्तव्य का अभिमान होता है और न ही व्यक्तिगत सुख की इच्छा, बल्कि दूसरों को सुखी रखने की भावना ही लीला कहलाती है। भगवान श्रीकृष्ण ने यही दिव्य लीला की, जिससे समस्त गोकुलवासी सुखी और संपन्न रहे।
उन्होंने आगे माखन चोरी लीला का आध्यात्मिक अर्थ बताते हुए कहा कि माखन चोरी का आशय मन की चोरी से है, जिसमें कन्हैया भक्तों के मन को अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। इस प्रकार उनकी बाल लीलाओं के वर्णन ने उपस्थित श्रोताओं को वात्सल्य प्रेम से सराबोर कर दिया।
कथा में आगे पंडित शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि कंस ने उनकी मृत्यु के लिए सबसे बलवान राक्षसी पूतना को भेजा, जो भेष बदलकर श्रीकृष्ण को अपने जहरीले स्तनपान का प्रयास करती है, लेकिन भगवान उसका वध कर देते हैं। इसके बाद कार्तिक मास में ब्रजवासी इंद्र पूजा की तैयारी करते हैं, परंतु श्रीकृष्ण उन्हें गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे क्रोधित होकर इंद्र भारी वर्षा करते हैं, जिससे गोकुल में हाहाकार मच जाता है।
ऐसे संकट के समय भगवान श्रीकृष्ण अपनी कनिष्ठ अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर समस्त ब्रजवासियों की रक्षा करते हैं, जिससे इंद्र का अहंकार समाप्त हो जाता है। इसके अतिरिक्त उन्होंने कंस वध का प्रसंग भी सुनाया, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा को कंस के आतंक से मुक्त किया।
इस धार्मिक आयोजन में राम रतन मीणा, प्यारे लाल, हरिओम मीणा, धर्मेंद्र, कल्पना, गीता, मीरा, विमला, अपनाघर सेवा समिति संरक्षक सीमा लवली तथा अशोक सेवक सहित अन्य श्रद्धालुओं का सहयोग उल्लेखनीय रहा।
यह कथा आयोजन क्षेत्र में भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन उपस्थित होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

Pratahkal Bureau
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