भुसावर में शरद पूर्णिमा पर अनोखा आयोजन, 101 किलो दूध की खीर का लगा भोग
प्राचीन कोठी वाले हनुमानजी मंदिर में चंद्रमा की चांदनी में खीर रखकर ठाकुरजी को लगाया गया भोग, दमा रोगियों के लिए मानी जाती है विशेष लाभकारी।

भुसावर के हनुमानजी मंदिर परिसर में ठाकुरजी की मूर्ति के सामने खड़े होकर खीर का प्रसाद लेते श्रद्धालु दिख रहे हैं।
भरतपुर जिले के ऐतिहासिक शहर भुसावर में शरद पूर्णिमा पर श्रद्धा और भक्ति का अनूठा दृश्य देखने को मिला। शहर सहित उपखंड मुख्यालय क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में स्थित मंदिरों और घरों में 25 अक्टूबर रविवार को शरद पूर्णिमा का पर्व धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भुसावर के हिंडोन सड़क मार्ग स्थित प्राचीन कोठी वाले हनुमानजी मंदिर परिसर में ठाकुरजी को 101 किलो दूध से बनी खीर का भोग लगाया गया। चंद्रमा की शीतल चांदनी में रखी गई खीर को रात 12 बजे भगवान को अर्पित किया गया।
अश्विन मास की शरद पूर्णिमा को नवन्ना पूर्णिमा, कौमुदी पूर्णिमा, कोजागिरी पूर्णिमा और कुमार पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी के दर्शन किए और परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि बनाए रखने के साथ विश्व कल्याण की कामना की।
प्राचीन कोठी वाले हनुमानजी मंदिर में पुजारी राघवेन्द्र जती के सानिध्य में भक्तों ने विशेष सजावट की। इस दौरान ठाकुरजी का धवल पोशाक में शृंगार किया गया। महिला सत्संग मंडल ने ढोलक, झांझ और मंजीरे की थाप पर हरिनाम संकीर्तन किया। भजन-कीर्तन के माध्यम से भगवान की आराधना करते हुए महिलाओं ने अपनी अरदास लगाई। रविवार, 25 अक्टूबर को 101 किलो दूध से खीर तैयार की गई और देर रात उसे चंद्रमा की चांदनी में रखा गया, ताकि चंद्रमा की शीतल किरणों से खीर शीतल हो सके। इसके बाद रात 12 बजे ठाकुरजी को खीर का भोग लगाया गया।
धार्मिक आयोजन के दौरान मंदिर परिसर हरे रामा, हरे कृष्णा के जयघोष और घंटे-घड़ियाल की ध्वनि से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ पूजा-अर्चना में भाग लिया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात दूध, चावल और चीनी के मिश्रण से तैयार खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इसी परंपरा के तहत मंदिर में तैयार खीर का सोमवार सुबह प्रसादी के रूप में वितरण किया गया।
पंडित पुष्पेन्द्र मिश्र, राघवेन्द्र शर्मा और महेश शर्मा के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर रविवार को सुबह 11 बजकर 55 मिनट से शुरू होकर 26 अक्टूबर की सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगी। धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चांदनी में रखी खीर ग्रहण करने से विशेष रूप से दमा रोगियों को काफी लाभ मिलता है। इसी मान्यता के चलते मंदिर में खीर तैयार करने, उसे चांदनी में रखने और मध्यरात्रि में ठाकुरजी को भोग लगाने की परंपरा निभाई गई।

Mohan Joshi, Bharatpur
नाम: मोहन लाल जोशी
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: भरतपुर (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): तहसील रिपोर्टिंग, क्राइम (अपराध), एग्रीकल्चर फार्मिंग (कृषि), प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जनसमस्याएं
परिचय एवं अनुभव
मोहन लाल जोशी को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में एक लंबा और विविध अनुभव है। वह वर्तमान में भरतपुर क्षेत्र से विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उनके करियर का विवरण निम्नलिखित है:
- राजस्थान पत्रिका: इन्होंने 10 वर्षों तक राजस्थान पत्रिका में अपनी सेवाएं दी हैं, जहाँ मुख्य रूप से क्राइम, एग्रीकल्चर फार्मिंग और जन समस्याओं से संबंधित विषयों पर विस्तृत कवरेज की।
- ईटीवी राजस्थान (जयपुर): 14 साल पहले इन्होंने ईटीवी राजस्थान, जयपुर के साथ काम किया।
- शेर-ए-हिंदुस्तान: इस मीडिया संस्थान के साथ भी काम करने का अनुभव।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
मोहन लाल जोशी शैक्षणिक और तकनीकी रूप से पत्रकारिता में उच्च योग्यता रखते हैं:
- स्नातक (Graduation)
- बीजेएमसी (BJMC): बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन
- पीएचडी (Ph.D.): पत्रकारिता (Journalism) में उनकी पीएचडी वर्तमान में जारी है।
