भुसावर अचार-मुरबा के नाम से प्रसिद्ध भुसावर सहित आसपास के गांव में लाल-हरी मिर्ची का जायका एवं चटकारा अचार डलना प्रारम्भ हो गया है। गत साल की अपेक्षा इस बार 30 से 50 प्रतिशत कम अचार तैयार होने का अनुमान है। मिर्ची के नए अचार को कारखाना के अलावा गांव-गांव की महिलाएं घरों पर ही तैयार कर रही हैं।

उत्पादन में कमी और गुणवत्ता पर जोर

  • अचार निर्माता प्रहलाद गुप्ता एवं विजय गुप्ता ने बताया कि मिर्ची का नया अचार तैयार होने लगा है।
  • अचार बनाते समय गुणवत्ता, शुद्धता एवं स्वाद सहित स्वच्छता आदि का ध्यान रखा जा रहा है।
  • "गत साल की अपेक्षा इस बार 30 से 50 प्रतिशत कम अचार तैयार होगा, जिसका कारण है कम ग्राहकी होना।"

मिर्ची के भाव और प्रमुख उत्पादक क्षेत्र

मिर्ची के भाव खुदरा में 80 रू प्रति किलोग्राम तथा थोक भाव 70 से 90 रू तक है। गांव भुसावर निवासी भगवानी देवी ने बताया कि भुसावर में अचार बनता अवश्य है, लेकिन मिर्ची की पैदावार इन स्थानों पर होती है:

  • जगजीवनपुर
  • सिरस
  • प्रेमनगर
  • हिसामडा
  • बल्लभगढ़
  • टुण्डपुरा
  • कमालपुरा

यहां की मिर्ची को स्थानीय लोग खेत से ही खरीद कर ले जाते हैं। भुसावर में अन्य राज्यों से भी मिर्ची आती है, वह भी चटकारी होती है, जिसकी मांग अचार निर्माता अधिक करते हैं।

"इस बार भुसावर, भरतपुर के कई अचार निर्माताओं ने स्थानीय मिर्ची की मांग की है, अभी तक मुझे 200 मन मिर्ची का आर्डर मिला है।"

महिलाओं को रोजगार और मजदूरी दर

भुसावर निवासी राधा एवं सुमन ने बताया कि अचार निर्माताओं ने मिर्ची का अचार तैयार कराना प्रारम्भ कर दिया है, जिससे महिलाओं को रोजगार मिलने लगा है। मिर्ची की सफाई एवं उसमें मसाला भरने की ऐवज में ढाई रू0 प्रति किलोग्राम की मजदूरी मिलती है।

"एक दिन में 200 से 300 किलोग्राम मिर्च तैयार कर देते हैं। करीब 500 से 700 रू0 प्रतिदिन की मजदूरी प्राप्त हो जाती है। मिर्ची तैयार करते समय धांस से बचाव का ध्यान रखा जाता है और मास्क का उपयोग करते हैं।"
Pratahkal Bureau

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