भरतपुर: भुसावर के चतुर्भुजी मंदिर में पुरुषोत्तम मास धार्मिक अनुष्ठान संपन्न
भुसावर कस्बे की बरपाड़ा कॉलोनी स्थित प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर में पुरुषोत्तम मास के समापन पर हवन-यज्ञ, महाआरती और भंडारे का आयोजन किया गया।

भरतपुर जिले के भुसावर कस्बे में स्थित प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर प्रांगण में पुरुषोत्तम मास के समापन अवसर पर विधि-विधान से हवन-यज्ञ करते मुख्य आचार्य पंडित पुष्पेंद्र मिश्र और श्रद्धालु। (दाएं से बाएं: यज्ञ वेदी के पास बैठे यजमान और पाठ करते पुजारी)
भुसावर (भरतपुर)। भरतपुर जिले के ऐतिहासिक शहरों में शुमार तहसील भुसावर कस्बे की बरपाड़ा कॉलोनी स्थित प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर प्रांगण में रविवार को भक्ति और श्रद्धा के अनूठे संगम के साथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का भव्य समापन हुआ। पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के पावन अवसर पर आयोजित इस धार्मिक महोत्सव के अंतिम दिन पूरा मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय माहौल में सराबोर नजर आया। इस दौरान चतुर्भुज जी महाराज की असीम कृपा प्राप्त करने और भगवान के दर्शन करने के लिए भुसावर कस्बे सहित आसपास के क्षेत्रों से भारी संख्या में श्रद्धालु मंदिर प्रांगण पहुंचे, जिससे पूरा क्षेत्र भगवान के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में मंदिर परिसर में लंबे समय से निरंतर चल रहे रामचरितमानस पाठ, भावपूर्ण भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक आयोजनों को पूर्णता प्रदान करने के लिए अंतिम दिन विधि-विधान के साथ भव्य हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ के दौरान मुख्य आचार्य पंडित पुष्पेंद्र मिश्र ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ वहां उपस्थित सभी श्रद्धालुओं से यज्ञ कुंड में आहुतियां समर्पित करवाईं। इस विशेष अनुष्ठान में मुख्य रूप से भुसावर क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ-साथ संपूर्ण विश्व कल्याण और मानव कल्याण की भावना को लेकर ईश्वर से विशेष प्रार्थना की गई।
हवन-यज्ञ में पूर्ण आहुति दिए जाने के बाद भगवान चतुर्भुज जी महाराज की भव्य महाआरती उतारी गई। महाआरती के संपन्न होते ही विशाल पंगत प्रसादी (भंडारे) का आयोजन शुरू हुआ, जिसमें भुसावर और आसपास के ग्रामीण अंचलों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसादी ग्रहण की। इस पावन अवसर पर महिला भक्त मंडल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हरि संकीर्तन मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा, जहां महिला श्रद्धालुओं ने ढोलक, झांझ और मजीरे की थाप पर भगवान को रिझाने वाले एक से बढ़कर एक मधुर भजनों की प्रस्तुतियां दीं और भजनों पर झूमते हुए नृत्य कर भगवान के चरणों में अपनी अरदास लगाई। धार्मिकता और लोक-आस्था के इस अनूठे समागम ने भुसावर क्षेत्र में सनातन संस्कृति की गहरी छाप को एक बार फिर रेखांकित किया है।

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