भुसावर (भरतपुर): "जब-जब धरती पर अत्याचार और अधर्म का भार बढ़ता है, तब-तब प्रभु का अवतार अवश्य होता है।" यह उद्घोष जयपुर से पधारीं बाल ब्रह्मचारणी कथा वाचिका डॉ. कृष्णा पाठक ने भरतपुर जिले के भुसावर उपखंड क्षेत्र स्थित बन्देश्वर महादेव मंदिर, बंध का नगला में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के दौरान व्यक्त किए। मलमास (पुरुषोत्तम मास) के पावन अवसर पर आयोजित इस सात दिवसीय धार्मिक महोत्सव के पांचवें दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और नंदोत्सव का प्रसंग इतना जीवंत रहा कि पूरा मंदिर परिसर कृष्णमय हो गया।

महोत्सव के संरक्षक रतन लाल बौहरा और ब्रह्मा देवी के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस कथा में डॉ. कृष्णा पाठक ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन में सुख और दुख प्रभु की कृपा का ही परिणाम हैं। उनके मुखारविंद से कृष्ण जन्म की कथा सुनते हुए उपस्थित जनसमूह भक्ति के सागर में गोते लगाने लगा। जैसे ही जन्मोत्सव का प्रसंग आया, "नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की" के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भजनों की मधुर धुन पर नृत्य कर अपनी श्रद्धा अर्पित की।

इस अवसर पर झांकी का मंचन अत्यंत मनमोहक रहा। इसमें वासुदेव की भूमिका लोकेश अवस्थी, माता देवकी की भूमिका अर्चना अवस्थी और नंदबाबा का चरित्र चित्रण अनिल बोहरा द्वारा किया गया। कथा के पांचवें दिन डॉ. पाठक ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, कालिया नाग मर्दन, गोवर्धन पूजा और इंद्र के मान-भंग जैसे प्रसंगों का सजीव वर्णन किया। भगवान के बाल स्वरूप की सजी अलौकिक झांकी उपस्थित भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही, जिसने सभी को भाव-विभोर कर दिया। महोत्सव का समापन प्रतिदिन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हो रहा है। यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि क्षेत्र में सामाजिक समरसता और भक्ति का अनूठा संगम भी बन गया है।

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Pratahkal Newsroom

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