गोवर्धन पूजा से भक्तिमय हुआ बंदेश्वर महादेव मंदिर, श्रीमद् भागवत कथा में उमड़े श्रद्धालु
भरतपुर के बंदेश्वर महादेव मंदिर में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में गोवर्धन पूजा के साथ श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। देखिए कैसे भक्ति और आस्था के संगम से गूंज उठा पूरा मंदिर परिसर।

भरतपुर जिले के भुसावर स्थित बंदेश्वर महादेव मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के दौरान बाल स्वरूप में सजे श्रीकृष्ण की झांकी के साथ उपस्थित श्रद्धालु।
भरतपुर जिले के भुसावर उपखंड क्षेत्र स्थित बंदेश्वर महादेव मंदिर, बंध का नगला के परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव इन दिनों क्षेत्र में भक्ति की बयार बहा रहा है। मलमास (पुरुषोत्तम मास) के पावन अवसर पर आयोजित इस सात दिवसीय संगीतमय महोत्सव का वातावरण भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के वर्णन से भक्तिमय हो गया है। कार्यक्रम के संरक्षक रतन लाल बौहरा एवं ब्रह्मा देवी के सानिध्य में 5 जून से शुरू हुआ यह आयोजन 11 जून तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 6 बजे तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
महोत्सव के पांचवें दिन कथा व्यास पीठ पर विराजमान जयपुर से पधारी बाल ब्रह्मचारिणी डॉ. कृष्णा पाठक ने अपने मुखारविंद से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मनोहारी वर्णन किया। कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, नामकरण संस्कार, पूतना वध, माखन चोरी और कंस द्वारा भेजे गए राक्षसों के संहार की कथा सुनकर उपस्थित श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। डॉ. पाठक ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गोवर्धन पूजा का आध्यात्मिक महत्व समझाते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति हमें सदैव जीवन देती है, परंतु मानव अपने स्वार्थ के लिए उसे नुकसान पहुंचा रहा है, जबकि हमें श्रीकृष्ण के संदेशों का अनुसरण करते हुए प्रकृति के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए।
इस विशेष अवसर पर मंदिर परिसर में गोवर्धन उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, जहां श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की मनमोहक झांकी आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। मंच पर नंदबाबा के रूप में लोकेश अवस्थी और माता यशोदा की भूमिका में अर्चना अवस्थी ने अपने जीवंत अभिनय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान कालिका मर्दन, गोवर्धन पूजा और इंद्र के मान-भंग के प्रसंगों ने उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को भक्ति भाव से भर दिया। कथा पांडाल में सजी छप्पन भोग की झांकी के दर्शन कर श्रद्धालु भजनों की धुन पर झूम उठे। कार्यक्रम का समापन आरती और छप्पन भोग की प्रसादी (कढ़ी-बाजरा) के वितरण के साथ हुआ, जिसने पूरे आयोजन को एक अविस्मरणीय अनुभव में बदल दिया।

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