भुसावर: पथैना सीएचसी में चिकित्सकों का टोटा, कागजों में स्वीकृत 5 पद पर धरातल 'शून्य'; राम भरोसे मरीजों की जान
भुसावर के पथैना सीएचसी में पिछले कई महीनों से चिकित्सकों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं ठप हैं। कागजों में 5 पद स्वीकृत होने के बावजूद एक भी डॉक्टर तैनात नहीं है, जिससे ग्रामीणों को महवा और भरतपुर भागना पड़ रहा है। कौशल फौजदार सहित ग्रामीणों ने विधायक बहादुर सिंह कोली और सांसद संजना जाटव से शिकायत की है, फिर भी शासन सचिव स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई।

भुसावर (भरतपुर)। राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते भुसावर उपखंड के गांव पथैना स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) वर्तमान में स्वयं बीमार नजर आ रहा है। पिछले कई महीनों से चिकित्सकों की अनुपस्थिति ने इस अस्पताल को केवल एक सफेद हाथी बना दिया है, जहाँ इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले असहाय मरीजों को केवल निराशा हाथ लग रही है। विडंबना यह है कि राज्य सरकार के रिकॉर्ड में इस सीएचसी पर पांच चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन धरातल पर हकीकत यह है कि यहाँ एक भी चिकित्सक तैनात नहीं है। आलम यह है कि करोड़ों की लागत से बना यह सरकारी अस्पताल वर्तमान में केवल कंपाउंडरों के भरोसे संचालित हो रहा है, जिससे ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई है।
अस्पताल में उपचार कराने पहुंचे पथैना निवासी कौशल फौजदार ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि चिकित्सकों के अभाव में स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सामान्य बीमारियों के लिए भी ग्रामीणों को दूर-दराज के शहरों जैसे महवा, भरतपुर और खेड़ली के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है बल्कि निर्धन परिवारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि आपातकालीन स्थिति में भी यहाँ कोई सुनने वाला नहीं होता, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है।
इस गंभीर समस्या को लेकर क्षेत्र के समाजसेवियों और जागरूक ग्रामीणों ने शासन प्रशासन के हर दरवाजे पर दस्तक दी है। ग्रामीणों द्वारा राज्य सरकार के चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के शासन सचिव (जयपुर) से लेकर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और जिला कलेक्टर भरतपुर तक को कई बार लिखित में गुहार लगाई जा चुकी है। स्थानीय राजनीतिक नेतृत्व की बात करें तो वैर विधायक बहादुर सिंह कोली और भरतपुर की सांसद संजना जाटव को भी इस बदहाल व्यवस्था से अवगत कराकर चिकित्सक नियुक्त करने की मांग की गई है। बावजूद इसके, शासन और प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। जनप्रतिनिधियों के आश्वासनों और कागजी दावों के बीच पथैना के ग्रामीण खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार कब इस सुध लेती है या फिर ग्रामीणों को इसी तरह कंपाउंडरों के भरोसे अपनी सेहत की बाजी लगानी पड़ेगी।

Pratahkal Bureau
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