भुसावर (निठार): बूंद-बूंद को तरसे ग्रामीण, जलदाय विभाग की लापरवाही के खिलाफ पानी की टंकी पर चढ़कर किया भारी प्रदर्शन
भुसावर के गांव निठार में पिछले 5 दिनों से जलापूर्ति ठप होने के कारण ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। चंद्रशेखर शर्मा, गिरीश शर्मा और पिंटू पंडित के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जलदाय विभाग और ठेकेदार के खिलाफ पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन किया। भीषण सर्दी में पानी की किल्लत झेल रहे ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की है। जानिए क्या है पूरा मामला और विभाग का इस पर क्या कहना है।

सावर (भरतपुर)। भुसावर उपखंड के गांव निठार में पिछले पांच दिनों से गहराया पेयजल संकट अब ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ चुका है। कड़ाके की सर्दी के बीच पानी की एक-एक बूंद के लिए जद्दोजहद कर रहे निठार वासियों का आक्रोश गुरुवार को फूट पड़ा। जलदाय विभाग और संबंधित ठेकेदार की कार्यप्रणाली से नाराज दर्जनों महिला-पुरुषों ने गांव की पानी की टंकी पर एकत्रित होकर विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपना विरोध दर्ज कराया। हाथों में खाली बर्तन लेकर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल करने की मांग की है।
गांव में व्याप्त इस विकट स्थिति को लेकर स्थानीय निवासी चंद्रशेखर शर्मा, गिरीश शर्मा और पिंटू पंडित ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि ठेकेदार की मनमानी और विभागीय अनदेखी के कारण पिछले पांच दिनों से गांव के नलों में पानी की एक बूंद तक नहीं टपकी है। आलम यह है कि इस ठिठुरती ठंड में ग्रामीणों को अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मीलों दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नियमित रूप से जल आपूर्ति न होने से न केवल घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि पशुपालकों के सामने भी मवेशियों को पानी पिलाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। गुरुवार को जब समस्या का कोई समाधान नहीं निकला, तो ग्रामीण लामबंद होकर टंकी पर चढ़ गए और ठेकेदार व अधिकारियों के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की।
इस पूरे घटनाक्रम और पेयजल संकट के विषय में जब जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिशाषी अभियंता हेमंत कुमार से संपर्क किया गया, तो उन्होंने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि तकनीकी खराबी के कारण मोटर बंद हो गई थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि मोटर को दुरुस्त करवा दिया गया है और बहुत जल्द गांव में जलापूर्ति सुचारू रूप से शुरू कर दी जाएगी। हालांकि, ग्रामीण अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नियमित सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो वे आंदोलन को और अधिक उग्र करने के लिए विवश होंगे। पांच दिनों से प्यासे गांव की यह तस्वीर प्रशासन और विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

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